अलवर में शाही लवाजमे के साथ सजे-धजे रथ में भगवान श्री सीताराम सवार होकर रूपबास के लिए रवाना हुए। रथयात्रा की शुरुआत पुलिस की सलामी और पुलिस बैंड की मधुर धुनों के साथ हुई। यात्रा मार्ग पर चारों ओर 'जय जगन्नाथ' और 'जय श्रीराम' के जयघोष गूंजते रहे। सैकड़ों श्रद्धालु रथ के साथ भजन-कीर्तन करते हुए चले। वहीं जबकि आकर्षक धार्मिक झांकियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। शहर के सुभाष चौक स्थित ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ मंदिर से यह रथयात्रा मंगलवार शाम करीब 6:30 बजे रवाना हुई। इसके बाद देर रात भगवान श्री सीताराम जी का रथ रूपबास मंदिर पहुंचेगा, जहां भगवान जगन्नाथ के विवाह समारोह की परंपरागत तैयारियों का अवलोकन किया जाएगा। रथयात्रा और श्रद्धालुओं की देखें PHOTOS… जगन्नाथ मंदिर के पट 72 घंटे बाद खोले इससे पहले मंगलवार सुबह 72 घंटे बाद श्री जगन्नाथ मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। भगवान श्रीजगन्नाथ जी का 11 पवित्र नदियों के जल से अभिषेक कर नए वस्त्र धारण कराए गए। दोपहर में परंपरा के अनुसार मंदिर शिखर पर ध्वजारोहण हुआ और 72 घंटे से चल रहे अखंड संकीर्तन का समापन किया गया। मंदिर की रसोइयां भी दोबारा शुरू हो गईं। कल निकलेगी 6 किलोमीटर लंबी यात्रा भगवान श्रीजगन्नाथ जी बुधवार शाम इंद्रविमान पर सवार होकर शाही बारात के रूप में नगर भ्रमण करेंगे। करीब छह किलोमीटर लंबी यह भव्य यात्रा हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में निकाली जाएगी। धार्मिक मान्यता है कि भगवान श्रीजगन्नाथ की रथयात्रा के दौरान अलवर में वर्षा अवश्य होती है, जिससे भक्तों के साथ-साथ पूरे शहर पर प्रभु की कृपा बनी रहती है।