अलवर में आखिरकार मानसून की एंट्री हो गई है। इस बार मानसून करीब 7 दिन की देरी से पहुंचा। आमतौर पर जिले में मानसून 25-26 जून के आसपास पहुंचता है, लेकिन इस बार जुलाई की शुरुआत में एंटर किया है। मानसूनी हवाओं के असर से अलवर शहर के साथ बहरोड़, तिजारा, किशनगढ़बास, राजगढ़, लक्ष्मणगढ़, थानागाजी, बानसूर, मुंडावर और आसपास के इलाकों में बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में भी जिले में अच्छी बारिश की संभावना बनी हुई है। जून महीने में अलवर में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई, जबकि जुलाई की शुरुआत मानसून की सक्रियता के साथ हुई है। जुलाई को सबसे ज्यादा बारिश वाला महीना माना जाता है और इसी महीने औसत बारिश का बड़ा हिस्सा रिकॉर्ड होता है। यदि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से लगातार नमी मिलती रही तो जुलाई में अच्छी बारिश होने की संभावना है, जिससे जून की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है। पिछले 10 साल में हुई बारिश का ट्रेंड पिछले एक दशक में अलवर में मानसून का प्रदर्शन हर साल अलग-अलग रहा। वर्ष 2017, 2021, 2023 और 2025 में सामान्य से अच्छी या ज्यादा बारिश दर्ज की गई। वहीं 2016, 2019, 2022 और 2024 अपेक्षाकृत कमजोर मानसून वाले वर्ष रहे। 2018 और 2020 में बारिश सामान्य के आसपास रही। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की सक्रियता, कम दबाव के क्षेत्र और नमी की उपलब्धता वर्षा को सबसे अधिक प्रभावित करती है। 2026 में कितनी बारिश हो सकती है? पिछले 10 साल के आंकड़ों के आधार पर यदि इस बार मानसून सामान्य रहता है तो अलवर जिले में करीब 550 से 700 मिमी तक बारिश होने की संभावना मानी जा रही है। हालांकि यह केवल सांख्यिकीय अनुमान है। वास्तविक बारिश मानसून की प्रगति, कम दबाव के क्षेत्रों, पश्चिमी विक्षोभ और स्थानीय मौसम प्रणालियों पर निर्भर करेगी।