अलवर जिले की सरकारी नर्सरियों में वन अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही का खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ रहा है। मानसून के सीजन में जहां बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया जाता है, वहीं सरकारी नर्सरी में इस बार ग्राफ्टेड (कलमी) पौधे तैयार ही नहीं कराए गए। नतीजतन, फलदार और बेहतर वैरायटी के पौधों के लिए लोगों को निजी नर्सरियों में जाकर मनमाने दाम चुकाने पड़ रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा खुद अलवर जिले के प्रभारी मंत्री हैं। वहीं प्रदेश के वन मंत्री संजय शर्मा और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव भी अलवर से ही आते हैं। इतने बड़े वीआईपी दिग्गजों के क्षेत्र में होने के बावजूद कृषि विभाग की यह लापरवाही प्रशासनिक तंत्र पर सवाल खड़े कर रही है। अफसरों का घिसा-पिटा जवाब, इस बार टेंडर नहीं हो पाए अधिकारियों का कहना है कि समय पर टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण इस बार नए ग्राफ्टेड पौधे तैयार नहीं किए जा सके। अब अफसरों का दावा है कि अगली बार के लिए टेंडर प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी ताकि समय पर पौधे मिल सकें। शहर के भवानीतोप स्थित नारायण विलास नर्सरी जिले की सबसे बड़ी उद्यान विभागीय नर्सरी है। नर्सरी मैनेजर पिंकी मीणा ने बताया कि नारायण विलास नर्सरी में आम, पपीता, अनार, नींबू, सजावटी पौधे, शीशम, करोंदा, लसोड़ा, आंवला, अमरूद और शहतूत सहित कई छायादार पौधे उपलब्ध हैं, जो आमजन के लिए बेचे जा रहे हैं। लेकिन ग्राफ्टैड पौधे नहीं हैं। नर्सरी के ठेकेदार राज सिंह ने बताया- अभी हमारे पास केवल पुराना स्टॉक ही उपलब्ध है, जिसे बेचा जा रहा है। इस बार नए पौधे तैयार ही नहीं हुए क्योंकि ग्राफ्टेड पौधों का टेंडर ही नहीं हुआ। फिलहाल चंपा, सीताफल, आम, जामुन, नींबू, अनार जैसे पौधे बेचे तो जा रहे हैं, लेकिन इनमें से कोई भी ग्राफ्टेड वैरायटी का नहीं है। नारायण विलास सरकारी नर्सरी में पौधों की रेट लिस्ट