अलवर में टिकट कटने के बाद भाजपा और कांग्रेस में बगावत के सुर दिखाई दे रहे हैं। वार्ड 27 में भाजपा की मंजू देवी ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया है, जबकि वार्ड 4 में पूर्व प्रधान अब्दुल की पुत्रवधू मीना भी बागी होकर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरेंगी। वहीं, वार्ड 6 में कांग्रेस से टिकट मांग रही हंसी मीणा ने भी टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ताल ठोक दी है। टिकट वितरण से नाराज इन दावेदारों के चुनाव लड़ने से दोनों दलों के सामने चुनौती खड़ी हो सकती है। पूर्व प्रधान अब्दुल के परिवार से भी निर्दलीय प्रत्याशी वार्ड 4 का चुनाव भी टिकट वितरण के बाद चर्चा में है। यहां पूर्व प्रधान अब्दुल की पुत्रवधू मीना निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं। अब्दुल कई वर्षों से कांग्रेस में सक्रिय रहे हैं। उनके बेटे शाकिर भी कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के आसपास राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय नजर आते रहे हैं। टिकट नहीं मिलने के बाद परिवार की ओर से निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया गया है। वार्ड 27 में भाजपा की मंजू देवी ने ठोकी ताल वार्ड 27 में भाजपा की मंजू देवी बागी होकर चुनाव लड़ रही हैं। टिकट वितरण के बाद उनका निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरना पार्टी के लिए स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। वार्ड 6 में कांग्रेस की हंसी मीणा भी निर्दलीय वार्ड 6 में हंसी मीणा कांग्रेस से टिकट मांग रही थीं। टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने का निर्णय लिया। इसके अलावा भी कई वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में हैं। इनमें कुछ ऐसे उम्मीदवार भी हैं, जिन्होंने नामांकन पत्र में केवल निर्दलीय का विकल्प चुना है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि वे पहले किस पार्टी से टिकट मांग रहे थे या उनका किसी राजनीतिक दल से संबंध रहा है। 208 नामांकन आए, 133 प्रत्याशी मैदान में बचे अलवर जिला परिषद के 39 वार्डों में सदस्य पद के लिए कुल 208 नामांकन जमा हुए थे। नाम वापसी के दिन 47 प्रत्याशियों ने अपने नाम वापस ले लिए, जबकि 28 नामांकन पत्र निरस्त हो गए। इसके बाद कुल 133 प्रत्याशी चुनाव मैदान में रह गए हैं। बताया गया है कि कुछ उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र में पार्टी के विकल्प का चयन किया था, लेकिन निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने का विकल्प नहीं भरा था। संबंधित पार्टी से टिकट नहीं मिलने और दूसरे उम्मीदवार को टिकट दिए जाने के बाद उनके नामांकन निरस्त हो गए। अब जिला परिषद के 39 वार्डों में भाजपा, कांग्रेस, अन्य राजनीतिक दलों और निर्दलीय प्रत्याशियों के बीच मुकाबला होगा। टिकट वितरण के बाद सामने आए बगावत के मामलों ने चुनावी तस्वीर को और दिलचस्प बना दिया है।