भास्कर एक्सक्लूसिव भीलवाड़ा के 160 स्कूलों में करीब 15 हजार छात्र 16 अलग-अलग कौशल शिक्षा में नामांकित हैं। पिछले दो सत्रों (2024-25 और 2025-26) से अधिकांश स्कूलों में ट्रेनर नहीं हैं। 8 हजार छात्र ऐसे हैं, जिन्हें पढ़ाने वाला कोई नहीं था। फिर भी 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा की मार्कशीट में उनके 85% से ज्यादा अंक हैं। बिना प्रैक्टिकल किए छात्र सरकारी कागजों में ही स्किलफुल हो रहे हैं। साफ है कि स्कूलों में शिक्षानहीं। सिर्फ नंबर बांटे जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में सत्र 2024 से ही वोकेशनल ट्रेनर की नियुक्तियां नहीं हुईं। भीलवाड़ा शहर के जिन 56 स्कूलों में ट्रेनर कार्यरत थे, उनका अनुबंध भी 31 मार्च को समाप्त हो गया। राबाउमावि गंगापुर, राबाउमावि जहाजपुर, हुरड़ा, बनेड़ा, बरुंदनी, कोठियां, कंवलियास, गुलाबपुरा, हमीरगढ़ जैसे 16 स्कूल हैं। यहां हेल्थ केयर और ब्यूटी एंड वैलनेस जैसे वोकेशनल ट्रेड खुले हुए हैं। दो साल से यहां इन दोनों ट्रेड के ट्रेनर नहीं हैं। इन ट्रेड में 800 से ज्यादा स्टूडेंट्स ने पिछले दो सत्रों 2024-25 और 2025-26 की बोर्ड परीक्षा दी। इन सभी स्टूडेंट्स को दोनों सत्रों में इस विषय में 80 फीसदी से ज्यादा अंक मिले। प्रैक्टिकल में सभी को 40 से ज्यादा अंक मिले। वोकेशनल विषयों में जिले के 160 स्कूलों के विद्यार्थी बोर्ड परीक्षा में 100 फीसदी विशेष योग्यता लेकर पास हुए। वोकेशनल में एक भी फेल नहीं हुआ। बैंकिंग, इंश्योरेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स ट्रेड के शिक्षक नहीं किश्नावतों की खेड़ी में फूड प्रोसेसिंग, पुर, पीएमश्री स्कूल मांडल, सांगानेर, मेजा सहित करीब 18 स्कूलों में इलेक्ट्रॉनिक्स एंड हार्डवेयर और बैंकिंग फाइनेंशियल सर्विसेज एंड इंश्योरेंस ट्रेड है। इन स्कूलों में भी एक भी ट्रेनर नहीं है। पिछले दोनों सत्रों की बोर्ड परीक्षा में करीब दो हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स को 80 प्रतिशत से ज्यादा अंक मिल गए। धामनिया स्कूल में इलेक्ट्रॉनिक्स एंड हार्डवेयर ट्रेड है। 10वीं व 12वीं में करीब 80 स्टूडेंट्स दो साल से बिना ट्रेनर के पढ़ाई कर रहे हैं। इस बार बोर्ड परीक्षा भी दी। वोकेशनल विषय में 70 बच्चे विशेष योग्यता से पास हुए हैं। रायला स्कूल में ऑटोमोटिव ट्रेड है। यहां भी 9वीं से 12वीं तक की कक्षाओं में करीब 150 स्टूडेंट्स हैं। पढ़ाने वाला कोई टीचर नहीं है। {स्कूलों में संचालित वोकेशनल ट्रेड... सूचना प्रौद्योगिकी एवं सेवाएं, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड हार्डवेयर, ब्यूटी एंड वेलनेस, रिटेल, प्लंबर, हेल्थकेयर, कंस्ट्रक्शन, एग्रीकल्चर, ऑटोमोबाइल, अपैरल मेड-अप एंड होम फर्निशिंग, बैंकिंग-फाइनेंस सर्विस एवं इंश्योरेंस, टूरिज्म एंड हॉस्पिटेलिटी, फूड प्रोसेसिंग, सिक्योरिटी, टेलीकॉम और मल्टीमीडिया। सभी विषयों में सेकंड डिवीजन, वोकेशनल में विशेष योग्यता से पास जिले के कई स्कूल ऐसे हैं, जहां 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा में सभी विषयों में सेकंड डिवीजन अंक हैं, लेकिन वोकेशनल विषय में विशेष योग्यता है। वह भी बिना टीचर के। राउमावि, ढिकोला के करीब 30 बच्चों में से 17 बच्चे सेकंड डिवीजन में पास हुए हैं, लेकिन वोकेशनल में विशेष योग्यता लेकर आए हैं। मेजा स्कूल में भी करीब 27 बच्चों में से केवल 8 के फर्स्ट डिवीजन हैं। 19 बच्चे सेकंड डिवीजन से पास हुए। वोकेशनल विषय में विशेष योग्यता मिली है। केस 1 : राउमावि मोगर, आसींद के 2026 की 12वीं कक्षा के विद्यार्थी को ऑटोमोटिव में 97 अंक मिले। वहीं, अन्य विषयों में 60 फीसदी अंक मिले हैं। केस 2 : राउमावि रायला के छात्र को 2024 की 12वीं बोर्ड परीक्षा में 5 विषयों में से ऑटोमोटिव (वोकेशनल) में सबसे ज्यादा 85 अंक आए। इसे पढ़ाने वाला कोई टीचर स्कूल में नहीं है। अन्य विषयों में 80 से कम अंक मिले हैं। केस 3 : राउमावि आटूण के 10वीं के विद्यार्थी का परिणाम फर्स्ट डिवीजन आया है। वोकेशनल विषय सूचना प्रौद्योगिकी और सेवाओं में 91 अंक आए हैं। जबकि यहां दो साल से प्रशिक्षक नहीं है। केस 4 : राउमावि धामनिया के 2025 की 10वीं बोर्ड के छात्र को इलेक्ट्रॉनिक्स में 91 अंक मिले। वहीं, जिस सोशल साइंस को शिक्षक ने साल भर पढ़ाया, उसमें छात्र को मात्र 66 अंक आए। बड़ा सवाल: जब सिखा ही नहीं तो प्रेक्टिकल कैसे कर रहे? ये केस चौंकाते हैं- अंकों का गणित... 1. प्रेक्टिकल (50 अंक): बिना ट्रेनर और लैब के भी छात्रों को 40 से 48 अंक दिए जा रहे हैं। 2. सत्रांक (20 अंक): इसमें 19-20 अंक मिल जाते हैं। 3. थ्योरी (30 अंक): कॉपी जांचने वालों को भी पता है कि स्कूलों में ट्रेनर नहीं हैं। इसलिए अंक देने में ढील बरती जाती है। 20+ अंक आसानी से मिल जाते हैं।