अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की सलूंबर इकाई द्वारा भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती के उपलक्ष्य में दूदर स्थित खंड कार्यालय में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। ‘सामाजिक समरसता’ विषय पर केंद्रित इस कार्यक्रम में शिक्षाविदों और समाजजनों ने भाग लिया। गोष्ठी में शिक्षाविद महेश चंद्र आमेटा ने कहा कि बाबासाहेब का जीवन दर्शन तभी सार्थक होगा, जब सामाजिक समरसता को केवल नारों तक सीमित न रखकर व्यवहार में उतारा जाए। उन्होंने डॉ. अंबेडकर के संघर्षों को याद करते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी प्रतिभा और गुरुजनों के मार्गदर्शन से दलित और पिछड़े वर्ग में शिक्षा की अलख जगाई। ‘शिक्षा शेरनी के दूध के समान है’ आमेटा ने बाबासाहेब के प्रसिद्ध कथन “शिक्षा शेरनी के दूध के समान है, जो पिएगा वह दहाड़ेगा” को दोहराते हुए समाज से अस्पृश्यता, असमानता और जातिगत भेदभाव जैसी कुरीतियों को समाप्त करने का आह्वान किया। उन्होंने एक सशक्त और एकजुट समाज के निर्माण के लिए सामूहिक संकल्प लेने पर जोर दिया। जिला और खंड स्तर के पदाधिकारी रहे मौजूद इस अवसर पर जिला अध्यक्ष हिमांशु भट्ट मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे, जबकि कृष्णकांत पानेरी और झल्लारा खंड अध्यक्ष लक्ष्मण लाल मीणा अतिविशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में ओम प्रकाश भट्ट, रमेश चाष्टा, विमल भट्ट, जिला कोषाध्यक्ष कन्हैया लाल सेवक, जिला मंत्री कमल आमेटा, जिला सभा अध्यक्ष देवीलाल मेहता, नरेंद्र पटेल, भगवती लाल, रमेश टेलर, ललिता पुरबिया, हेमलता शर्मा और मुकेश चाष्टा सहित कई पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे। गोष्ठी के अंत में खंड अध्यक्ष गजेंद्र चौबीसा ने सभी अतिथियों और उपस्थितजनों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन खंड मंत्री नरेश चाष्टा ने किया। अंत में डॉ. अंबेडकर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया गया।