भास्कर न्यूज़ | भीलवाड़ा आरके कॉलोनी स्थित दिगंबर जैन मंदिर में गुरुवार सुबह ग्रीष्मकालीन वाचना के दौरान मुनि प्रणीत सागर ने आधुनिक समाज में बढ़ती संवेदनहीनता और पारिवारिक मूल्यों के क्षरण पर चिंता जताई। उन्होंने “जिसने तुम्हें पाला, तुमने उसे निकाला” पंक्ति के माध्यम से कहा कि उपकार करने वालों को भूल जाना आज की सबसे बड़ी विडंबना बनती जा रही है, जिससे वृद्धाश्रम जैसी स्थितियां बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय और जैन परंपरा का आधार कृतज्ञता और सहयोग रहा है, जिसे जीवन में अपनाना जरूरी है। धन और सुविधाओं की दौड़ में लोग माता-पिता, गुरु और शिक्षकों के योगदान को भूलते जा रहे हैं। मुनि ने कहा कि जिन माता-पिता ने जीवन दिया और शिक्षा दिलाई, उन्हें वृद्धावस्था में उपेक्षा मिलना दुखद है। उन्होंने “परस्परोपग्रहो जीवानाम” के सिद्धांत को जीवन में उतारने का आह्वान किया और कहा कि धर्म केवल पूजा नहीं, बल्कि सेवा और सम्मान का भाव है। यदि परिवारों में कृतज्ञता और सम्मान लौट आए तो सामाजिक विकृतियां स्वतः कम हो सकती हैं।