भास्कर संवाददाता | झुंझुनूं स्थानीय निकायों और पंचायती राज चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का भविष्य तय करने वाला सर्वे शुरू हो चुका है। राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग के निर्देश पर जिला प्रशासन की टीमें 10 जुलाई से घर-घर पहुंच रही हैं। लेकिन डिजिटल सर्वे में पारदर्शिता के लिए पहली बार इस्तेमाल किया जा रहा राजधारा सर्वे मोबाइल एप तकनीकी खामी के कारण काम नहीं कर रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका व आशा सहयोगिनियों द्वारा सर्वे का बहिष्कार भी जारी है। बीएलओ घर-घर जाकर ऑफलाइन डाटा एकत्रित कर रहे हैं। 23 जुलाई तक चलने वाला यह सर्वे केवल सामान्य जनगणना नहीं है, बल्कि आगामी चुनावों में ओबीसी वर्ग की सीटों और आरक्षण के दायरे को नए सिरे से तय करने का सबसे बड़ा आधार बनेगा। बीएलओ और उनके सहायक मुख्य रूप से पांच श्रेणियों में बंटे सवाल पूछ रहे हैं। इस फॉर्मेट का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि ओबीसी जातियों की धरातल पर आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक स्थिति क्या है। कुछ समय पहले सर्वे से पहले यहां एक टीम आई थी। जिसने ओबीसी वर्ग के लोगों से चर्चा की थी। > राजनीतिक प्रतिनिधित्व : आपके परिवार से कोई सदस्य वार्ड पार्षद, सरपंच, प्रधान, जिला परिषद सदस्य या चेयरमैन रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य राजनीतिक प्रतिनिधित्व तय करना है। आपके क्षेत्र में ओबीसी वर्ग की राजनीतिक भागीदारी के प्रति आपकी क्या राय है। > सामाजिक व जनसांख्यिकी स्थिति : परिवार में कुल कितने सदस्य हैं। आपकी मूल उपजाति क्या है। क्या परिवार का कोई सदस्य परंपरागत पैतृक व्यवसाय से जुड़ा है या काम बदल चुका है। > शैक्षणिक स्तर : परिवार में साक्षरता की स्थिति क्या है। उच्च शिक्षा या तकनीकी शिक्षा प्राप्त सदस्य कितने हैं। घर के बच्चे सरकारी स्कूलों या निजी संस्थानों में पढ़ रहे हैं। > आर्थिक आधार और आजीविका : परिवार की मासिक व वार्षिक आय का मुख्य स्रोत क्या है। आपके पास कुल कितनी कृषि भूमि या आवासीय संपत्ति है। क्या परिवार का कोई सदस्य आय कर देता है। > स्थानीय निकाय से जुड़ाव : क्या आपको और आपके परिवार को नगर निगम या जिला परिषद की लोक कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल रहा है। राज्य के अन्य पिछड़ा वर्ग परिवारों का सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक डाटा जुटाने के लिए राज्यव्यापी डिजिटल सर्वे किया जा रहा है। इसके लिए 1742 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा सहयोगिनियों व सहायिकाओं के साथ संबंधित क्षेत्र के 2019 बीएलओ को प्रगणक नियुक्त किया गया है। इनके द्वारा किए जा रहे सर्वे में सहयोग के लिए ग्राम विकास अधिकारियों को लगाया गया है। लेकिन चार दिन से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा सहयोगिनियों व सहायिकाओं द्वारा सर्वे का बहिष्कार जारी है। इसलिए केवल बीएलओ ही ओबीसी वर्ग के घर-घर जाकर डाटा एकत्रित कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के मूल कार्यों के अलावा अन्य विभाग के काम करवाने का विरोध : आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं के बाद मंगलवार को आशा सहयोगिनियों ने भी कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। उन्होंने कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग को ज्ञापन देकर ओबीसी सर्वे व अन्य विभागों के काम सौंपे जाने का विरोध जताया। राजस्थान आशा सहयोगिनी यूनियन की अध्यक्ष मंजू लालपुरिया ने बताया कि उन्हें स्वास्थ्य विभाग के मूल कार्यों के अलावा अन्य विभाग के काम सौंपे जा रहे हैं। वर्तमान में ओबीसी आयोग की ओर से राजधारा एप के जरिए सर्वे का काम दिया गया है। यह उनके कार्य क्षेत्र से बाहर है। इस कारण गांवों में गर्भवती महिलाओं और बच्चों की स्वास्थ्य सेवाएं, टीकाकरण, आयुष्मान कार्ड और ई-केवाईसी जैसे जरूरी काम भी प्रभावित हो रहे हैं। इससे उनके पारिवारिक जीवन पर भी असर पड़ रहा है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि इस पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो अनिश्चितकालीन धरना और आंदोलन किया जाएगा। इस दौरान सुमन, आशा, रेखा, मनीषा सैनी, सनोज शर्मा, इंदुबाला, बृजेश, पूनम, माया, लक्ष्मी, सुमन, सरोज, कमलेश, पार्वती, संजना, रश्मि, कृष्णा, संजू, सुप्यार मीणा, शर्मिला, अंगूरी आदि आशाएं मौजूद रहीं।