झालावाड़ में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। हजारों महिला कार्यकर्ताओं ने मिनी सचिवालय पहुंचकर तीन घंटे से अधिक समय तक प्रदर्शन किया, भजन-गीत गाकर विरोध जताया और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन और उग्र होगा। भजन-गीत गाकर दर्ज कराया विरोध अखिल राजस्थान महिला एवं बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ के बैनर तले आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने शहीद निर्भय सिंह सर्किल से रैली निकालकर मिनी सचिवालय तक मार्च किया। जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर महिलाओं ने भजन और गीत गाकर अनोखे अंदाज में विरोध दर्ज कराया। इसके बाद जिला प्रशासन को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप जिलाध्यक्ष मंजू कारपेंटर ने बताया कि संगठन ने सरकार पर बार-बार आश्वासन देने, लेकिन मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लेने का आरोप लगाया है। ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि आंदोलन के दौरान वार्ता और जल्द समाधान का भरोसा दिया गया था, लेकिन अब तक कोई आदेश जारी नहीं हुआ। इससे प्रदेशभर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं में नाराजगी बढ़ रही है। आंदोलन तेज करने की चेतावनी संगठन ने मुख्यमंत्री से लंबित मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग की है। ज्ञापन में 1 जुलाई को प्रदेशव्यापी कार्य बहिष्कार और 7 जुलाई से आम हड़ताल व तालाबंदी के आह्वान का भी उल्लेख किया गया है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाए तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। ये हैं प्रमुख मांगें आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने ऑनलाइन सेनेटरी नेपकिन वितरण का कार्य बंद कर इसे संबंधित विभाग को सौंपने की मांग की है। आईसीडीएस से जुड़े कार्यों की प्रोत्साहन राशि का भुगतान, बजट घोषणा 2025-26 के अनुसार 1 अप्रैल 2025 से सेवानिवृत्त आंगनबाड़ी कार्मिकों को ग्रेच्युटी का आदेश जारी करने और लंबित भुगतान करने की मांग भी उठाई गई। भवन किराया और बकाया भुगतान का मुद्दा संगठन का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी 200 रुपए और शहरी क्षेत्रों में 750 रुपए भवन किराया दिया जा रहा है, जबकि केंद्र सरकार अधिक किराया देने के निर्देश दे चुकी है। कई कार्यकर्ताओं ने निर्धारित मानकों के अनुसार अधिक किराये पर भवन लिए हैं, लेकिन उन्हें एक वर्ष से भवन किराये का भुगतान नहीं मिला है। इसके अलावा सामुदायिक गतिविधियों, सीबीई, प्रोत्साहन राशि तथा राज्य और केंद्र सरकार से जुड़े अन्य लंबित भुगतानों का शीघ्र निस्तारण करने की भी मांग की गई है।