आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आईं। कार्यकर्ताओं ने विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और कलेक्टर व महिला एवं बाल विकास विभाग के उपनिदेशक को ज्ञापन सौंपा। महिलाओं का कहना है कि उनसे तय 4 घंटे की ड्यूटी से कहीं ज्यादा काम लिया जा रहा है, जिससे वे मानसिक तनाव में हैं। ​'पाठशाला' छोड़ 'सर्वे' में उलझी कार्यकर्ता ​आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने विरोध जताते हुए कहा कि आंगनबाड़ी का मुख्य उद्देश्य छोटे बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा और पोषण देना है। पहले सभी कार्य ऑफलाइन होते थे, लेकिन अब सब कुछ ऑनलाइन कर दिया गया है। कार्यकर्ताओं ने कहा कि ऑनलाइन डेटा फीडिंग और सर्वे के चक्कर में बच्चों को पढ़ाने के लिए समय ही नहीं बचता। पोषण ट्रैकर पर बच्चों का वजन, लंबाई और पोषाहार की ऑनलाइन एंट्री पहले से ही सिरदर्द बनी हुई है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) के ऑनलाइन फॉर्म भरने की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर है। ​​'उड़ान योजना' को लेकर सबसे ज्यादा गुस्सा ज्ञापन में मुख्य रूप से 'उड़ान योजना' (सेनेटरी नेपकिन वितरण) के कार्य का विरोध किया गया। कार्यकर्ताओं ने बताया कि इस योजना के तहत उन्हें हर घर का सर्वे, हर लाभार्थी का पंजीकरण और सबसे कठिन 'फेस वेरिफिकेशन' करने को कहा जा रहा है। कार्यकर्ताओं ने कहा हमारा काम बच्चों को संभालना है। अब हमें सेनेटरी नेपकिन बांटने और उनका ऑनलाइन वेरिफिकेशन करने में लगा दिया गया है। शहरी क्षेत्रों में एक कार्यकर्ता के पास 2 से 3 वार्डों का जिम्मा है। ​प्रमुख मांगें ​उड़ान योजना से मुक्ति: सेनेटरी नेपकिन सर्वे और वितरण का कार्य संबंधित विभाग के फील्ड स्टाफ को सौंपा जाए। ​ऑनलाइन कार्यों में कटौती: केवल अनिवार्य डेटा ही ऑनलाइन लिया जाए ताकि बच्चों की 'प्री-स्कूल' शिक्षा पर ध्यान दिया जा सके। ​कार्यक्षेत्र का निर्धारण: शहरी क्षेत्रों में वार्डों की संख्या के हिसाब से कार्यभार कम किया जाए।