अलवर जिले में हजारों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। महिला एवं बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष लतेश शर्मा के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने मोती डूंगरी से मिनी सचिवालय तक सोमवार को रैली निकाली। इसके बाद मिनी सचिवालय के मुख्य गेट पर धरना देकर सरकार के खिलाफ नारे लगाए। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने राज्य कर्मचारी का दर्जा देने, मानदेय बढ़ाने और अन्य लंबित मांगों को लेकर यह प्रदर्शन किया। वहीं प्रदर्शन के दौरान महिलाएं जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने की मांग पर अड़ गईं। जब एडीएम द्वितीय ज्ञापन लेने पहुंचे तो प्रदर्शनकारियों ने उन्हें ज्ञापन देने से इनकार कर दिया। वे कलेक्टर के आने की मांग पर डटी रहीं। इसी दौरान जिला कलेक्टर डॉ. अर्तिका शुक्ला सचिवालय के दूसरे गेट से निकल गईं, जिससे प्रदर्शनकारियों में नाराजगी और बढ़ गईं। प्रदर्शन से जुड़े देखें PHOTOS… कहा- एक महीने से कर रहे आंदोलन, सरकार ने नहीं लिया निर्णय प्रदर्शनकारी महिलाओं ने कहा- हम एक महीने से मांगों को लेकर आंदोलन कर रही हैं। कई बार ज्ञापन देने और अधिकारियों से बातचीत के बावजूद सरकार ने हमारी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया। उनका कहना था कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। मानदेय में सम्मानजनक बढ़ोतरी की जाए और सेवा समाप्ति के बाद सामाजिक सुरक्षा के उचित प्रावधान किए जाएं। धरने के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने आंगनबाड़ी केंद्रों में मिलने वाले पोषाहार की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि बच्चों के लिए आने वाले पोषाहार में कई बार कीड़े और छिपकलियां निकल चुकी हैं। जब इसकी शिकायत की जाती है तो विभाग के अधिकारी मामले को दबाने का दबाव बनाते हैं। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उच्च स्तर पर शिकायतों को दबाया जाता है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती। कांग्रेस ने किया समर्थन प्रदर्शन को जिला कांग्रेस कमेटी और महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी समर्थन दिया। जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रकाश गंगावता ने कहा- आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मांगें जायज हैं। सरकार को इन्हें जल्द स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस विधायक विधानसभा के आगामी सत्र में भी इन मांगों को प्रमुखता से उठाएंगे। ये हैं मांगें महिला एवं बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष लतेश शर्मा ने कहा- आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को नियमित कर्मचारी बनाया जाए। कम से कम 25 हजार रुपए मासिक वेतन, रिटायरमेंट पर 10 लाख रुपए की एकमुश्त सहायता और 2 हजार रुपए मासिक पेंशन दी जाए।