शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में निशुल्क प्रवेश देने में धांधली और आनाकानी के आरोप लग रहे हैं। वार्ड 7 के पूर्व पार्षद हिदायततुल्लाह के नेतृत्व में बुधवार को कई अभिभावकों ने जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक मुख्यालय) डॉ. लोकेश भारती के कार्यालय पहुंचकर घेराव किया। समस्याएं से बताकर ज्ञापन सौंपा। पूर्व पार्षद ने बताया कि कानूनन सभी निजी विद्यालयों को 25 प्रतिशत सीटें वंचित और कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रखनी होती हैं। इन बच्चों की फीस राज्य सरकार भरती है। शिक्षा विभाग भी निजी स्कूलों को मान्यता भी इसी शर्त पर देता है कि वे इस अधिनियम की पालना करेंगे। लेकिन इन दिनों गरीब माता-पिता जब अपने बच्चों के निशुल्क प्रवेश के लिए आवेदन कर रहे हैं तो निजी विद्यालय मनमानी कर रहे हैं। ये स्कूल बिना किसी ठोस कारण के अनावश्यक रूप से आवेदनों को निरस्त कर कर रहे हैं। अभिभावकों ने कुछ स्कूलों का नाम लेते हुए शिकायत की। कहा कि इन विद्यालयों द्वारा लगभग सभी आरटीई आवेदनों निरस्त किए जा रहे हैं। अभिभावक जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. भारती से चर्चा करते हुए।