उम्मेदाबाद के गोविंद सोलंकी ने अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। जापान के आइची-नागोया में आयोजित 5वें एशियन पैरा गेम्स में भारतीय पैरा एथलीट राधा वेंकटेश ने 1500 मीटर रेस में रजत पदक जीता। इस स्पर्धा में गोविंद ने उनके गाइड रनर के रूप में साथ दौड़कर अहम भूमिका निभाई। 19 अक्टूबर को हुई इस स्पर्धा में राधा वेंकटेश ने 5 मिनट 30.90 सेकंड में दौड़ पूरी कर रजत पदक अपने नाम किया। वहीं, भारत की सौम्या कुमार ने 5 मिनट 12.39 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता। इस तरह भारत ने इस स्पर्धा में स्वर्ण और रजत दोनों पदक हासिल किए। 2016 में राष्ट्रीय स्तर पर किया डेब्यू, दुबई में भी दिखाया दम गोविंद सोलंकी ने साल-2016 में तमिलनाडु के कोयंबटूर में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर अपने खेल सफर की शुरुआत की। इसके बाद वर्ष 2022 और 2023 में दुबई में आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लिया। इन प्रतियोगिताओं में उन्होंने एक बार पहला और एक बार दूसरा स्थान हासिल किया। वर्ष 2023 में उन्हें पहली बार एशियन पैरा गेम्स में गाइड रनर के रूप में भाग लेने का अवसर मिला। इसके बाद से उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई और राधा वेंकटेश के साथ मिलकर देश के लिए पदक जीतने में योगदान दिया। 2023 में चीन में दोनों की जोड़ी ने जीता था स्वर्ण गोविंद सोलंकी और राधा वेंकटेश की जोड़ी इससे पहले भी एशियन पैरा गेम्स में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुकी है। साल-2023 में चीन के हांगझोऊ में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में राधा ने महिलाओं की 1500 मीटर टी-13 श्रेणी में स्वर्ण पदक जीता था। उस दौरान उन्होंने गोविंद के साथ 5 मिनट 19 सेकंड में दौड़ पूरी कर खिताब अपने नाम किया था। जापान में रजत पदक जीतकर इस जोड़ी ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का गौरव बढ़ाया है। गांव में 5वीं तक पढ़ाई, बेंगलूरु में संभाला कारोबार गोविंद सोलंकी का जन्म उम्मेदाबाद गांव में हुआ। उन्होंने पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई गांव में ही की। इसके बाद वे बेंगलूरु चले गए और पिता के साथ पारिवारिक व्यवसाय में सहयोग करने लगे। चार भाइयों में तीसरे नंबर के गोविंद ने कारोबार की जिम्मेदारियों के बीच भी दौड़ने का अभ्यास जारी रखा। गोविंद जब भी गांव आते हैं, तो सुबह उम्मेदाबाद से डांगरा तक दौड़ लगाते हैं और फिर वापस लौटते हैं। उनका यह अभ्यास मार्ग करीब 12 किलोमीटर का है। छह वर्ष पहले पिता का निधन हो गया था। इसके बावजूद गोविंद ने व्यवसाय की जिम्मेदारियों के साथ खेल के प्रति अपने जुनून और नियमित अभ्यास को बनाए रखा। लगातार मेहनत और समर्पण के दम पर गोविंद आज अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर अपनी पहचान बना रहे हैं। उनकी उपलब्धि ने उम्मेदाबाद गांव का नाम रोशन किया है।