ऑस्ट्रेलिया में पंजाबी बोलने पर ट्रक ड्राइवर पर थूक दिया गया। रेडियो पर पत्नियों को गुलाम बनाकर बेचने और बच्चों को जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। ऑस्ट्रेलियाई मीडिया संस्थान ABC न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय ड्राइवरों को पगड़ी पहनने और आपस में पंजाबी में बात करने पर लगातार निशाना बनाया जा रहा है। ऑस्ट्रेलियन ट्रकिंग एसोसिएशन (ATA) और नेशनल हेवी व्हीकल रेगुलेटर (NHVR) ने इस तरह के व्यवहार की निंदा की है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह का मानसिक तनाव ड्राइवरों के स्वास्थ्य पर असर डालता है। इससे उनका ध्यान बंटता है और सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया ऑस्ट्रेलिया यात्रा के ठीक बाद ऑस्ट्रेलिया के गृह मंत्री टोनी बर्क ने इस पूरे मामले पर कड़ी नाराजगी जताई है। एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू में बर्क ने माना कि ऑस्ट्रेलियाई सड़कों और ट्रकों के अंदर इस्तेमाल होने वाले सीबी रेडियो पर भारतीय ड्राइवरों को निशाना बनाना एक कड़वी सच्चाई है। बता दें, ऑस्ट्रेलिया में 5 हजार के करीब पंजाबी मूल के ट्रक ड्राइवर हैं। ये वे लोग हैं, जिन्होंने सरकारी कागजों में अपनी मातृ भाषा पंजाबी लिखवाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि असल संख्या 7 से 8 हजार के करीब हो सकती है। धमकी भरे ऑडियो में क्या कहा गया इंस्टाग्राम पर यह ऑडियो क्रिएटर एगी (@babysoftarms) ने शेयर किया है। यह ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (ABC) की जांच का हिस्सा है। ट्रक ड्राइवरों के बीच रेडियो पर आमतौर पर सड़क सुरक्षा या रूट की बात होती है, लेकिन इस क्लिप में नफरत भरी आवाजें आ रही हैं। एक व्यक्ति कहता है- भारतीयों को मार डालो। श्वेत आदमी के लिए खड़े हो। गृह युद्ध आने वाला है। हम सभी भारतीय पुरुषों को मार डालेंगे, उनके बच्चों को पानी में डुबो देंगे और उनकी औरतों को गुलामी के लिए बेच देंगे। लहजे के आधार पर गालियां ABC की रिपोर्ट में कई भारतीय ड्राइवरों ने बताया कि ऑस्ट्रेलियाई सड़कों पर नस्लवाद उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया है। एक ड्राइवर ने कहा कि अगर आपका लहजा ऑस्ट्रेलियाई है तो कोई समस्या नहीं, लेकिन अगर पंजाबी या भारतीय अंदाज में बोलते हो तो रेडियो पर भारी गालियां मिलती हैं। इन लगातार धमकियों से परेशान होकर कई भारतीय ड्राइवरों ने रेडियो का इस्तेमाल करना ही छोड़ दिया है। वे अब इस तरह की बातचीत से दूर रहते हैं। पंजाबी ड्राइवरों ने ये दिक्कतें बताईं… भारतीय ड्राइवरों की सुरक्षा के लिए ऑस्ट्रेलियाई सरकार क्या कर रही… ऑस्ट्रेलिया एक ऑर्केस्ट्रा की तरह है, जहां हर संस्कृति की अपनी जगह गृहमंत्री टोनी बर्क ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया कभी किसी एक समाज का देश नहीं रहा है। हम एक ऑर्केस्ट्रा (संगीत मंडली) की तरह हैं। इसमें कई अलग-अलग तरह के यंत्र होते हैं, लेकिन जब सब मिलकर बजते हैं तो एक खूबसूरत धुन बनती है। भारतीय समुदाय के खिलाफ ऐसी नफरत की हमारे देश में कोई जगह नहीं है। क्यों अहम हैं भारतीय ड्राइवर? ऑस्ट्रेलिया की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में भारतीय ऑस्ट्रेलिया का सबसे तेजी से बढ़ने वाला प्रवासी समुदाय बनकर उभरा है। इनमें से बड़ी संख्या में भारतीयों ने ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में श्रमिकों की कमी को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इंटरनेशनल रोड ट्रांसपोर्ट यूनियन (IRTU) के वर्ष 2024 के अनुमान के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया में लगभग 28,000 भारी वाहन ड्राइवरों की कमी थी। रिपोर्ट के अनुसार, सिख और पंजाबी प्रवासियों के लिए ट्रक चलाना कोई नया पेशा नहीं है। उनके परिवारों का लंबे समय से खेती-बाड़ी और परिवहन व्यवसाय से जुड़ाव रहा है, इसलिए बड़ी संख्या में सिख और पंजाबी समुदाय के लोग ऑस्ट्रेलिया में भी ट्रक ड्राइविंग को रोजगार के रूप में अपनाते हैं। हालांकि, नस्लीय घटनाए बढ़ने के बाद पुराने ड्राइवर रिटायर हो रहे हैं और नए स्थानीय युवा इस काम में नहीं आ रहे हैं। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया की सप्लाई चेन और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में समस्या पैदा हो सकती है। ---------- यह खबर भी पढ़ें… कनाडा सरकार का पंजाबियों को झटका, PR होने पर भी पेरेंट्स, दादा-दादी को साथ नहीं बसा पाएंगे कनाडा में रह रहे लाखों भारतीयों, खासकर पंजाबी समुदाय को बड़ा झटका लगा है। कनाडा सरकार ने 15 जुलाई 2026 से पेरेंट्स एंड ग्रैंडपेरेंट्स प्रोग्राम (PGP) के तहत नई स्पॉन्सरशिप अर्जियाें पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। इससे अब कनाडा में PR हासिल कर चुके नए आवेदक अपने माता-पिता और दादा-दादी को स्थायी निवास (PR) दिलाने के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगे। पढ़ें पूरी खबर…