बालोतरा जिले के पाटोदी बाजार में इन दिनों सांगरी की आवक देखी जा रही है। जिससे बाजार में रौनक बनी हुई है। हालांकि इस साल सांगरी की कुल पैदावार पिछले सालों की तुलना में कम रही है। जिसका असर कीमतों पर दिख रहा है। क्षेत्र के कुछ इलाकों में अच्छी गुणवत्ता की सांगरी हुई है, जबकि कई जगहों पर 'गिल्डु' (अधपकी फलियां) अधिक मात्रा में पाई गई हैं। पिछले साल की तुलना में कीमतों में उछाल बाजार में सांगरी के भाव वर्तमान में ऊंचे बने हुए हैं। दुकानदार किसानों से सांगरी लगभग 900 रुपए प्रति किलोग्राम के भाव से खरीद रहे हैं। व्यापारियों के अनुसार, इस बार सांगरी की आवक सीमित है, जिसके कारण उन्हें ऊंचे दामों पर खरीद करनी पड़ रही है। पिछले साल की तुलना में कम आपूर्ति के चलते कीमतों में उछाल आया है। मौसम से सांगरी पर पड़ा असर किसानों ने बताया कि इस वर्ष मौसम ने सांगरी की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। आंधी और बारिश के कारण खेजड़ी के पेड़ों पर आई 'मिंजर' (फूल) समय से पहले ही झड़ गई, जिससे सांगरी का विकास बाधित हुआ। इसके परिणामस्वरूप उत्पादन में कमी आई और 'गिल्डु' की मात्रा बढ़ गई। उत्पादन घटने और गुणवत्ता प्रभावित होने से किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऊंचे दामों पर खरीदने के लिए मजबूर सांगरी राजस्थान के पारंपरिक व्यंजनों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसकी सब्जी न केवल स्वादिष्ट होती है, बल्कि यह स्थानीय संस्कृति का भी अहम अंग है। हालांकि, इस बार कम पैदावार और बढ़ती मांग के कारण उपभोक्ताओं को यह पारंपरिक स्वाद ऊंचे दामों पर खरीदना पड़ रहा है।