प्रदेश के बैंकों में पड़े 64 लाख लावारिस खातों की ₹1,800 करोड़ की गाढ़ी कमाई में से पिछले छह माह में सिर्फ ₹151.69 करोड़ यानी 8.42% राशि ही असली वारिसों तक पहुंच पाई है। अब भी बैंकों को ₹1648 करोड़ के वारिसों की तलाश है। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति राजस्थान यानी एसएलबीसी के आंकड़े बताते हैं कि केंद्रीय वित्त मंत्री की ओर से 4 अक्टूबर, 2025 को शुरू किए गए ‘आपकी पूंजी, आपका अधिकार’ अभियान के बावजूद प्रदेश में 91% लावारिस राशि अब भी दावेदारों तक नहीं पहुंच सकी है। अभियान के तहत दिसंबर तक असली वारिसों को राशि लौटानी थी। एसएलबीसी के मुताबिक, 31 मार्च तक 64,869 खाते सेटल हुए। इनमें से 1 लाख से अधिक राशि वाले सिर्फ 2,447 खाते थे, पर इन्हीं खातों से ₹109.21 करोड़ लौटे। यानी सेटल खातों में बड़े खाते केवल 3.77% थे, पर लौटाई राशि का 72% हिस्सा इन्हीं से निकला। इसके उलट 1 लाख से कम राशि वाले 62,422 खाते यानी 96.23% खाते सेटल हुए, लेकिन इनसे करीब ₹42.48 करोड़ ही लौटे। इससे साफ है कि संख्या छोटे खातों की ज्यादा है, पर असली रकम बड़े खातों में फंसी है। जयपुर में सबसे ज्यादा 10,944 खातों के ₹31.52 करोड़ लौटाए। यानी प्रदेश में लौटी कुल राशि का 20.78% हिस्सा अकेले जयपुर में गया। उदयपुर में ₹10.73 करोड़ और जोधपुर में ₹9.06 करोड़ लौटे। इन चार पॉइंट से समझें प्रदेश के जिलों की स्थिति 96% खाते छोटे, पर 72% रकम बड़े खातों से 62,422 छोटे खातों से करीब ₹42.48 करोड़, जबकि 2,447 बड़े खातों से ₹109.21 करोड़ लौटे। जयपुर टॉप, पर रकम का फैलाव असमान.. जयपुर में ₹31.52 करोड़ लौटे; टॉप 5 जिलों में कुल राशि का करीब 43% हिस्सा गया। खातों की संख्या से रकम का अंदाजा नहीं श्रीगंगानगर में 4,392 खाते सेटल, लेकिन औसत ₹8,035; करौली में 747 खाते, औसत ₹52,822। औसत सेटलमेंट ₹23,384 बड़े खातों का औसत ₹4.46 लाख और छोटे खातों का औसत ₹6,806 रहा। क्यों लावारिस हो जाती है गाढ़ी कमाई? अनक्लेम्ड डिपॉजिट बढ़ने के 3 कारण हैं। पहला, खाताधारक की मृत्यु और परिवार को खाते की जानकारी नहीं होना। दूसरा, खातों में नॉमिनेशन अपडेट नहीं होना। तीसरा, दूसरे शहरों में पलायन। क्या करें? : आरबीआई ने UDGAM पोर्टल शुरू किया है। इससे घर बैठे यह चेक कर सकते हैं कि परिजनों के नाम पर किसी सरकारी या निजी बैंक में लावारिस राशि तो नहीं पड़ी है।