सलूंबर जिले की ग्राम पंचायत बस्सी सामचोत में पीएम आवास योजना (ग्रामीण) में लाभार्थी ने आरोप लगाया है कि उसके नाम से आवास स्वीकृत होने के बावजूद जियो टैगिंग किसी दूसरे मकान की कर दी गई और योजना की दो किस्तों की राशि भी किसी दूसरे लाभार्थी बैंक खाते में भेज दी गई। मामले में पीड़ित ने जिला कलेक्टर को शिकायत देकर निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। शिकायतकर्ता लक्ष्मण सिंह पुत्र धूल सिंह के अनुसार, उनके नाम से प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत आवास क्रमांक 183 स्वीकृत हुआ था। हालांकि, उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं थी। जब उन्होंने ग्राम पंचायत में जानकारी ली तो रिकॉर्ड में उनके नाम पर ₹15,000 और ₹4,50,000 की दो किस्तों का भुगतान दर्शाया गया। लक्ष्मण सिंह का कहना है कि उनके बैंक खाते में योजना की कोई राशि नहीं आई और न ही उनके नाम पर किसी प्रकार का निर्माण कार्य हुआ। दस्तावेजों की जांच में सामने आया मामला परिजनों ने दस्तावेजों की जांच कराई तो कथित तौर पर पता चला कि योजना सके पोर्टल पर अपलोड की गई जियो टैगिंग किसी दूसरे मकान की है। निर्माण की तस्वीरें भी दूसरे घर की लगाई गई हैं। आरोप है कि भुगतान भी लाभार्थी के खाते में भेजने के बजाय किसी अन्य बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिया गया। इसके बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में भुगतान और निर्माण कार्य पूरा होना दर्शाया गया है। VDO बोले- एक जैसे नाम होने से हुई होगी त्रुटि मामले में बस्सी सामचोत के विकास अधिकारी (VDO) हितेंद्र सिंह ने कहा कि योजना का लाभ पात्र व्यक्ति को ही मिला है। वर्ष 2021-22 में पंजीयन के दौरान संभवतः एक जैसे नाम वाले दो व्यक्तियों के कारण दूसरे व्यक्ति के बैंक खाते का विवरण दर्ज हो गया होगा। उन्होंने बताया कि शिकायतकर्ता लक्ष्मण सिंह पुत्र धूल सिंह का पक्का मकान पहले से बना हुआ है। यह मामला वर्ष 2021-22 का है और उन्होंने हाल ही में ग्राम पंचायत का कार्यभार संभाला है, इसलिए उस समय हुई प्रक्रिया से उनका कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच के बाद वास्तविक तथ्य सामने आ जाएंगे।