बांसवाड़ा जिला मुख्यालय से करीब 60 किमी दूर शक्करवाड़ा गांव में सन्नाटा है। जहां तीन दिन पहले तक एक हंसता-खेलता छोटा सा परिवार बसता था, आज वहां सिसकियां हैं। 6 महीने का मासूम कभी भूख से रोता है, तो कभी अपनी बंद मुट्ठियों से हवा में मां का आंचल तलाशने की कोशिश करता है। उसे नहीं पता कि जिस मां की गोद में वह कल तक सोता था, वह अब कभी नहीं लौटेगी... और जिस बाप के कंधों का उसे सहारा था, वह हॉस्पिटल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है। 'घर आ जाओ सुनील...' और टूट गईं उम्मीदें सूरत (गुजरात) में तपती धूप में मजदूरी कर रहे 23 साल के सुनील के पसीने से भीगे हाथों में जब फोन बजा, तो परिजनों की सिर्फ एक ही आवाज आई- 'सुनील, तुरंत घर आ जाओ।' सुनील का दिल किसी अनहोनी की आशंका से कांप उठा। 29 जुलाई की उस मनहूस दोपहर को 22 साल की सुनीता (सुनील की पत्नी) को जहरीले सांप ने डस लिया था। परिजन बदहवास हालत में उसे हॉस्पिटल ले गए, लेकिन इलाज के दौरान सुनीता की सांसें थम गईं। सुनील से यह बात छुपाई गई ताकि वह रास्ते में आपा न खो बैठे। जब सुनील अपने गांव पहुंचा, तो दरवाजे पर लोगों की भीड़ देख उसके कदम ठिठक गए। अंदर आंगन में सफेद चादर में लिपटी सुनीता की देह पड़ी थी। सुनील बिना कुछ बोले वहीं घुटनों के बल गिर पड़ा। उसकी चीख निकल पड़ी। हे राम! यह क्या हो गया... मुझे क्यों छोड़ गई सुनीता? श्मशान से लौटकर मासूम को देखा, तो फूट-फूटकर रो पड़ा सुनील के चचेरे भाई राजू ने बताया- 30 जुलाई को सुनीता का अंतिम संस्कार किया गया। सुनील भारी कदमों से घर लौटा। घर में कदम रखते ही उसकी नजर 6 महीने के मासूम बेटे पर पड़ी, जो भूख से बिलख रहा था। सुनील ने अपने कलेजे के टुकड़े को सीने से लगा लिया और फफक-फफक कर रोने लगा। पत्नी की यादें उसे पल-पल कचोट रही थीं। वह बार-बार बच्चे का चेहरा देखता और सुनीता का नाम लेकर रोने लगता। पूरे घर में सन्नाटा था, सुनील पूरी रात गुमसुम बैठा रहा। न एक बूंद पानी पीया, न किसी से बात की। 'अब सहा नहीं जाता...' 31 जुलाई की शाम को जब घर के लोग काम में व्यस्त थे, सुनील की आंखों के सामने पत्नी की हंसी और बच्चे का बिलखता चेहरा बार-बार घूमने लगा। सदमे और गम के इस कदर हावी होने पर सुनील हिम्मत हार गया। उसने घर के कोने में रखी जहरीली गोलियां निगल लीं। जब तक परिजनों को भनक लगती, सुनील तड़पने लगा। परिजन चीखते-चिल्लाते हुए उसे लेकर बांसवाड़ा के महात्मा गांधी (एमजी) हॉस्पिटल भागे। मासूम के सिर से मां का साया उठा, पिता अस्पताल में भर्ती फिलहाल एमजी अस्पताल के आईसीयू में सुनील की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। डॉक्टर उसे बचाने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं। शक्करवाड़ा गांव का हर शख्स इस दोहरे हादसे से सदमे में है। 6 महीने का बच्चा, जो अभी ठीक से 'मां' और 'पापा' कहना भी नहीं सीखा था, उसकी मां दुनिया छोड़ चुकी है और पिता अस्पताल के बेड पर जिंदगी की जंग लड़ रहा है। गांव के बुजुर्ग बस यही दुआ कर रहे हैं- हे भगवान, मासूम पर रहम कर, उसके पिता की जान बख्श दे...। ------- यह खबर भी पढ़िए… सांप डसता रहा, डीजे पर रील बनाता रहा नाबालिग, मौत; देव आगमन की प्रथा में नाचते रहे लोग चित्तौड़गढ़ में सांप को लेकर रील बना रहे नाबालिग की मौत हो गई। किशोर के घर में कॉमन करैत सांप निकला था। इसके बाद वह उसे हाथ में लेकर रील बनाते हुए देव आगमन की प्रथा के तहत लोकदेवता के थान जा रहा था। पढ़ें पूरी खबर...