बारां के प्रताप चौक पर श्री महावीर कला मण्डल संस्थान की रामलीला में सोमवार रात लक्ष्मण के शक्ति बाण लगने और कुंभकरण वध का मंचन किया गया। इन दृश्यों को प्रभावी बनाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक अस्त्र-शस्त्रों का उपयोग किया गया। मंचन में रावण ने अपने पुत्र मेघनाद को युद्ध क्षेत्र में भेजा। लक्ष्मण और मेघनाद के युद्ध के दौरान ब्रह्मास्त्र के प्रयोग से लक्ष्मण मूर्छित हो गए। मेघनाद ने घायल लक्ष्मण को ले जाने की कोशिश की, तभी हनुमान जी ने द्वंद्व युद्ध कर उन्हें राम दल में वापस ले आए। भाई की यह दशा देखकर प्रभु श्रीराम दुखी हो गए। जामवंत के कहने पर वैद्य सुषेण को बुलाया गया। उन्होंने ऋष्यमूक पर्वत से संजीवनी बूटी लाने की सलाह दी। हनुमान जी ने रावण द्वारा भेजे गए कालनेमि का वध किया और पूरा पर्वत ही उठा लाए। इसके बाद सुषेण ने लक्ष्मण को जीवनदान दिया। फिर रावण ने अपने भाई कुंभकरण को जगाकर युद्ध में भेजा। कुंभकरण ने राम दल में खलबली मचा दी, लेकिन अंत में राम के बाणों से उसका वध हो गया।