बाड़मेर में हाईटेंशन लाइनों के मुआवजे को लेकर किसानों का धरना प्रदर्शन गुरुवार को 78वें दिन भी जारी है। किसानों का आरोप है कि प्रशासन उनका सहयोग नहीं कर रहा है और कंपनियों के अनुसार काम कर रहा है। गुरुवार को प्रशासनिक अधिकारियों के साथ हुई वार्ता विफल रही, जिसके बाद किसानों ने आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है। किसान जोगाराम भोजासर ने कहा - खेतों से हाईटेंशन लाइनें निकाली जा रही हैं, लेकिन प्रशासन हमारी मदद नहीं कर रहा है। हम अपना वाजिब हक लेकर रहेंगे, चाहे जान भी क्यों न देनी पड़े। दरअसल, बाड़मेर जिले के बायतु तहसील के डेढ़ दर्जन गांवों से हाईटेंशन लाइट ट्रांसमिशन लाइनों का काम चल रहा है। किसान अपनी जमीन का मुआवजा मांग रहे हैं, लेकिन उन्हें गिरफ्तार किया गया, जिसके विरोध में उन्होंने प्रदर्शन शुरू कर दिया। भोजासर गांव में धरना दिया गया और 2 महीने पहले किसानों ने भोजासर से बाड़मेर कलेक्ट्रेट तक कूच किया था। उस समय प्रशासन ने उन्हें निंबोणियों की ढाणी टोल पर रोक दिया था। प्रशासन के साथ वार्ता के बाद किसान माने, लेकिन धरना जारी रखा। किसानों को मुआवजा नहीं देने का आरोप किसानों के प्रतिनिधिमंडल और प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों के साथ हुई वार्ता में कोई सहमति नहीं बन पाई। आरएलपी नेता जालाराम ने कहा कि प्रशासन कंपनी के कहे अनुसार काम कर रहा है और किसानों को उचित मुआवजा नहीं दे रहा है। किसान भूराराम ने बताया कि कंपनी नाममात्र का मुआवजा दे रही है, जबकि उनकी मांग है कि उन्हें 3 से 5 लाख तक का मुआवजा दिया जाए। धोरों की जमीन पर 3 लाख और समतल जमीन के लिए 5 लाख रुपए की मांग की गई है। प्रशासन ने नियमों का हवाला देते हुए इसे अस्वीकार कर दिया है। किसानों का कहना है कि आज के समय में उनकी मदद कोई नहीं करना चाहता, लेकिन वे अपना वाजिब हक लेकर रहेंगे।