नगर परिषद बाड़मेर में करीब दो दशक से फर्जीवाड़ा चल रहा है। कार्मिकों की मिलीभगत से पहले नियम विरुद्ध काम करते हैं और इसके बाद पट्टे जारी कर फाइल गायब करवा दी जाती है, ताकि फर्जीवाड़ा पकड़ में भी आए तो नगर परिषद में रिकार्ड ही नहीं मिले। 2013 से 2026 तक करीब 25 हजार से ज्यादा पट्टे जारी किए गए है, लेकिन 20778 फाइलें ही रिकार्ड में हैं। करीब 4 हजार से ज्यादा फाइलें गायब है। जबकि 2016 में नगर परिषद ने सभी फाइलों को कम्प्यूटराइज्ड करने का आदेश दिया था। इसके बाद भी फाइलों के गायब होने का सिलसिला थम नहीं रहा है। 2023 में नगर परिषद की ओर से जारी हुए पट्टों में भी बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा हुआ और रिकार्ड से सैकड़ों फाइलें गायब कर दी गई। इतने बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा होने के बाद भी स्वायत्त शासन विभाग की ओर से फाइलें गायब होने के मामले में आज दिन तक जांच नहीं की और न ही एफआईआर हुई है। 2023 में जारी 11000 पट्टों में 800 पट्टे फर्जीवाड़े के कारण किए निरस्त कम्प्यूटराइज्ड फाइलें - नगर परिषद की रिकार्ड शाखा में कम्प्यूटराइज्ड होने के बाद भी गायब होने का सिलसिला थम नहीं रहा है। कार्मिक यहां रिकार्ड से तो फाइलें अपने नाम लिखवा कर ले गए हैं, लेकिन रिकार्ड में फाइलें नहीं है। 2017 तक 9604 फाइलें कम्प्यूटराइज्ड हैं। इसके अलावा स्टेट ग्रांट की 2159, 69ए की 2500 फाइलें है। इसके अलावा 2023 में 6515 फाइलें रिकार्ड शाखा में कम्प्यूटराइज्ड की गई। ऐसे में करीब 20778 फाइलें कम्प्यूटराइज्ड है। जबकि अब तक करीब 25 हजार से ज्यादा पट्टे जारी किए गए है। हालांकि 2013 के पहले की फाइलें अलग है। 2023 में फर्जीवाड़े की आज तक जांच नहीं 2023 में प्रशासन शहरों के संग अभियान में करीब 11 हजार से ज्यादा पट्टे जारी ​किए गए, लेकिन इसमें राजनीतिक रसूखदार और फर्जीवाड़ा कर हजारों पट्टे नियम विरुद्ध जारी कर दिए। इन पट्टों की आज दिन तक न तो जांच हुई और न ही एफआईआर। कृषि व राजकीय भूमि के 7184 पट्टे जारी किए गए। कॉलोनियों के 1460 पट्टे, 69ए के 2432 पट्टे जारी किए गए। इन पट्टों में 137 पट्टे तो जांच में फर्जीवाड़ा पाए जाने पर निरस्त कर दिए गए। जबकि 600 से ज्यादा ऐसे पट्टे हैं, जिन्हें एक सामूहिक आदेश से निरस्त किया गया है। गाढ़ी कमाई पर फर्जी मुहर नगर परिषद के कोष में लाखों रुपए जमा कराने वाले आम नागरिक आज खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। जिस पट्टे को उन्होंने अपने आशियाने की सुरक्षा माना था, वह महज एक रद्दी का टुकड़ा बन गया है। भ्रष्टाचार की इस आग में आम आदमी का घर जल रहा है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी और सफेदपोश अपनी जेबें गरम कर मौन साधे बैठे हैं।