बाड़मेर में विजयादशमी पर मंगलवार को गढ़ मंदिर स्थित नागणेच्चया माता मंदिर में शस्त्रों की पूजा की गई। रावत त्रिभुवन सिंह की मौजूदगी में पंडित ने मंत्रोच्चार के साथ पूजन करवाया। इसके बाद राजपूत समाज की ओर से पथ प्रेरणा यात्रा निकाली गई। केसरिया साफा और पारंपरिक वेशभूषा में युवा व समाज के लोग शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए राणी रूपादे संस्थान पहुंचे। रास्ते में कई जगह फूल बरसाकर यात्रा का स्वागत किया गया। नागणेच्चया माता मंदिर में किया शस्त्र पूजन विजयादशमी पर हजारों साल पुरानी परंपरा के तहत गढ़ मंदिर स्थित नागणेच्चया माता मंदिर में शस्त्रों की पूजा की गई। रावत त्रिभुवन सिंह की मौजूदगी में पंडित ने मंत्रोच्चार के साथ पूजन करवाया। इस दौरान हथियारों पर मौली बांधी गई और तिलक लगाया गया। रावत त्रिभुवन सिंह ने कहा कि शस्त्र पूजन उनकी पौराणिक मान्यता का हिस्सा है। उन्होंने कहा, "आज हमने उन्हीं पुरानी संस्कृति और त्योहारों को उसी तरीके से मनाने की कोशिश की है। हमारे जितने भी त्योहार हैं, उन्हें उसी तरीके से मनाया जाए, जैसे पहले मनाया जाता रहा है। शस्त्र पूजन हमारी संस्कृति का हिस्सा रहा है।" उन्होंने कहा कि इसके बाद पथ प्रेरणा यात्रा निकाली गई। परिवार के लोग पारंपरिक वेशभूषा में केसरिया साफा पहनकर शहर में यात्रा निकालते हैं। यह यात्रा केसरिया ध्वज के नेतृत्व में निकलती है और संस्कृति को बचाए रखने का प्रतीक है। नागणेच्चया माता मंदिर से सुबह 11 बजे शुरू हुई यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरी। यात्रा में केसरिया साफा पहने युवा और समाज के लोग पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। हाथों में भाले और तलवार लिए घोड़ों पर सवार ध्वजवाहकों ने यात्रा की अगुवानी की। इसके बाद केसरिया ध्वज लेकर राजपूत बोर्डिंग के स्टूडेंट्स पहले दल का नेतृत्व कर रहे थे। यात्रा हनुमान मंदिर, गांधी चौक, मुख्य बाजार, अहिंसा सर्किल, किसान बोर्डिंग, विवेकानंद सर्किल और राय कॉलोनी तनसिंह सर्किल से होते हुए राणी रूपादे संस्थान पहुंची। यहां यात्रा सभा में बदल गई। भाटी हुए शामिल, विश्नोई ने बरसाए फूल पथ प्रेरणा यात्रा में शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी भी शामिल हुए। यात्रा के दौरान मंत्री के.के. विश्नोई ने फूल बरसाकर स्वागत किया। शहर के अलग-अलग स्थानों पर लोगों ने पुष्पवर्षा कर यात्रा में शामिल लोगों का स्वागत किया। हर साल विजयादशमी पर निकलती है यात्रा पौराणिक सभ्यता और संस्कृति को जीवित रखने के उद्देश्य से राजपूत समाज की ओर से हर साल विजयादशमी पर पथ प्रेरणा यात्रा निकाली जाती है। इस साल भी रावत त्रिभुवन सिंह के सानिध्य में गढ़ स्थित नागणेच्चया माता मंदिर से यात्रा रवाना हुई। यात्रा में पारंपरिक वेशभूषा, केसरिया साफे, शस्त्र और ध्वज शामिल रहे।