चित्तौड़गढ़ जिले की बस्सी सेंचुरी में जंगल बढ़ाने के लिए वन विभाग ने इस बार नई तकनीक अपनाई है। सेंचुरी के बिछोर नाका क्षेत्र की दुर्गम पहाड़ी पर ड्रोन के जरिए करीब 7 हजार सीड बॉल, 20 से 25 किलो स्थानीय पौधों के बीज और 30 से 35 किलो घास के बीज डाले गए हैं। यह काम डीएफओ राहुल झाझरिया के निर्देशन में किया गया। वन विभाग अब सितंबर और फरवरी 2027 में सर्वे कर इस प्रयोग के नतीजों का आकलन करेगा। 20 हेक्टेयर क्षेत्र चुना, जहां पेड़ों की संख्या सबसे कम थी वन विभाग ने इस अभियान के लिए बस्सी सेंचुरी के बिछोर नाका का करीब 20 हेक्टेयर क्षेत्र चुना। इस हिस्से में पेड़ों की संख्या काफी कम है और प्राकृतिक हरियाली भी कमजोर हो चुकी है। विभाग का मानना है कि बारिश के साथ बीज अंकुरित होने पर आने वाले समय में यहां हरियाली बढ़ सकती है। इस प्रोजेक्ट के तहत करीब 7 हजार सीड बॉल तैयार किए गए। इनके अलावा 20 से 25 किलो स्थानीय पौधों के बीज और 30 से 35 किलो घास के बीज भी ड्रोन के जरिए पूरे इलाके में फैलाए गए। बीजों का चयन स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया गया, ताकि अंकुरित होने के बाद पौधे आसानी से बढ़ सकें और जंगल का प्राकृतिक स्वरूप विकसित हो सके। पहले सीड बॉल तैयार किए, फिर ड्रोन से सीडिंग बस्सी के एसीएफ यशवंत कंवर ने बताया कि इस अभियान की तैयारी कई दिन पहले शुरू कर दी गई थी। सबसे पहले मिट्टी और सूखी घास की मदद से सीड बॉल तैयार किए गए। हर सीड बॉल के बीच में जगह छोड़ी गई, जिसमें बाद में बीज डाले गए। बारिश का मौसम शुरू होने से पहले खैर, बेर और क्षेत्र में प्राकृतिक रूप से मिलने वाली दूसरी स्थानीय प्रजातियों के बीज सीड बॉल में भरकर उन्हें दोबारा मिट्टी से बंद किया गया। कुल मिलाकर करीब 7 हजार सीड बॉल तैयार किए गए। इसके बाद 27 और 28 जून को ड्रोन की मदद से इन्हें पहाड़ियों पर गिराया गया। एक बार में ड्रोन करीब 15 से 20 किलो वजन लेकर उड़ान भरता था और पूरे इलाके में अलग-अलग स्थानों पर बीज फैलाता गया। सीड बॉल के साथ बिना बॉल वाले सामान्य बीज और घास के बीज भी डाले गए, ताकि अलग-अलग स्तर पर हरियाली विकसित हो सके। तीन स्तर पर हरियाली बढ़ाने की योजना एसीएफ यशवंत कंवर ने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य केवल बड़े पेड़ उगाना नहीं है। योजना के तहत ऊंचे पेड़ों के साथ झाड़ियां और जमीन पर घास भी विकसित करने की कोशिश की जा रही है। इससे जंगल की प्राकृतिक संरचना मजबूत होगी, जमीन को सुरक्षा मिलेगी और वन्यजीवों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार होगा। 60 से 70 डिग्री ढलान वाली पहाड़ी पर पहुंचना था चुनौती जिस पहाड़ी पर यह काम किया गया, वहां 60 से 70 डिग्री तक ढलान है। आम लोगों का वहां पहुंचना लगभग संभव नहीं है। वन विभाग की टीम भी ट्रैक करके बड़ी मुश्किल से वहां पहुंची और पूरे क्षेत्र का निरीक्षण किया। रास्ता नहीं होने के कारण टीम को खुद रास्ता बनाते हुए आगे बढ़ना पड़ा। निरीक्षण के बाद तय किया गया कि इस इलाके में ड्रोन के जरिए बीज डालना सबसे बेहतर विकल्प रहेगा। पहले ड्रोन से सर्वे, अब सितंबर और फरवरी 2027 में होगी जांच वन विभाग ने इस अभियान से पहले 27 जून को ड्रोन से पूरे क्षेत्र की फोटोग्राफी कराई, ताकि इलाके में पहले से मौजूद हरियाली और पेड़ों की स्थिति का रिकॉर्ड तैयार किया जा सके। इसके अगले दिन पूरे क्षेत्र में ड्रोन से सीड बॉल और अन्य बीजों की सीडिंग की गई। अब सितंबर में पहली बार इस इलाके का सर्वे किया जाएगा। इसमें देखा जाएगा कि कितने बीज अंकुरित हुए और कितना असर दिखाई दिया। इसके बाद फरवरी 2027 में दोबारा निरीक्षण होगा। दोनों चरणों के परिणामों की तुलना कर यह तय किया जाएगा कि ड्रोन से सीड बॉल डालने का यह प्रयोग कितना सफल रहा। फिलहाल वन विभाग इसे जंगल बढ़ाने की नई पहल के रूप में देख रहा है। अगर रिजल्ट अच्छे रहे तो भविष्य में बस्सी सेंचुरी के दूसरे दुर्गम इलाकों और अन्य वन क्षेत्रों में भी इसी तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है।