ब्यावर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने मंगलवार को "ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे- से नो टू ड्रग्स, से यस टू योर ड्रीम्स" अभियान के तहत जिलेभर के सरकारी और निजी स्कूलों में नशामुक्ति एवं विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किए। इन शिविरों में विद्यार्थियों को मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों और उनसे संबंधित कानूनी प्रावधानों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। अभियान का मुख्य कार्यक्रम सेंट पॉल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, ब्यावर में संपन्न हुआ। यहां जिला एवं सेशन न्यायाधीश व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष हारून ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने बताया कि नशा व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। न्यायाधीश हारून ने विद्यार्थियों से नशे और गलत संगति से दूर रहने, शिक्षा को जीवन का लक्ष्य बनाने और अनुशासित एवं स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने परिवार और समाज में भी नशामुक्ति का संदेश फैलाने के लिए प्रेरित किया। यह कार्यक्रम जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं अपर जिला न्यायाधीश सोनल पारीख के समन्वय में आयोजित किया गया। इस अवसर पर स्कूल प्रिंसिपल, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से व्याख्याता भरतेन्दु श्रीमाली और अन्य शिक्षकगण उपस्थित रहे। इसी क्रम में सचिव सोनल पारीख ने राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल, गणेशपुरा में आयोजित शिविर में विद्यार्थियों को तंबाकू, शराब और अन्य मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों से अवगत कराया। उन्होंने जोर देकर कहा कि नशा व्यक्ति के स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवार और भविष्य को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। विद्यार्थियों से नशे से दूर रहने और अपने साथियों व परिवारजनों को भी नशामुक्त जीवन के लिए प्रेरित करने का आग्रह किया गया। अभियान के तहत न्यायिक अधिकारी विकास सिंह चौधरी, विजय प्रकाश सोनी, अनीता शर्मा, पंकज सांखला, प्रवीण चौहान, प्रवीण शंकर, मोनिका चौधरी, हर्षित शर्मा, राघवेन्द्र दाधीच, लक्ष्या वधवा, सुषमा जाखड़ और अमन तेंगुरिया सहित कई अन्य अधिकारियों ने जिले के विभिन्न विद्यालयों में जागरूकता शिविर आयोजित किए। इन अधिकारियों ने विद्यार्थियों को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभाव, शिक्षा का महत्व, विधिक अधिकार और जिम्मेदार नागरिक के कर्तव्यों की जानकारी दी, साथ ही नशामुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय भागीदारी का संकल्प भी दिलाया।