जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने शनिवार को ब्यावर जिला न्यायालय परिसर सहित जिले के सभी तहसील मुख्यालयों पर विशेष लोक अदालत का आयोजन किया। इस अदालत का उद्देश्य परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 (चेक अनादरण) से संबंधित मामलों का निस्तारण करना था। इस दौरान जिलेभर में कुल 204 चेक बाउंस मामलों का आपसी समझौते के आधार पर सफलतापूर्वक समाधान किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं जिला एवं सत्र न्यायाधीश हारून के निर्देश पर यह विशेष लोक अदालत आयोजित की गई। प्राधिकरण की सचिव एवं अपर जिला न्यायाधीश सोनल पारीख की उपस्थिति में गठित पीठ ने पक्षकारों के बीच सुलह-समझौते के प्रयास किए, जिससे कई मामलों का निस्तारण संभव हो सका। ब्यावर मुख्यालय पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संख्या-1 विकास सिंह चौधरी और सदस्य अधिवक्ता शिवदास राठौड़ ने लोक अदालत की कार्रवाई का संचालन किया। इस विशेष लोक अदालत की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि वर्ष 2007 से लंबित एक चेक अनादरण प्रकरण का निस्तारण रही। लगभग 19 वर्षों से चले आ रहे इस विवाद का समाधान अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-1 ब्यावर प्रवीण चौहान के मार्गदर्शन में हुआ। अधिवक्ता तुषार दुबे और आशा कुमारी ने प्री-काउंसलिंग के माध्यम से दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित कराया, जिसके बाद आपसी सहमति से राजीनामा हुआ और इस लंबे समय से लंबित विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान निकल सका। ब्यावर के अलावा, बर, बिजयनगर, मसूदा और जैतारण तालुका मुख्यालयों पर भी विशेष लोक अदालतों का आयोजन किया गया। इन स्थानों पर भी परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 से संबंधित कई मामलों का समझौते के आधार पर निस्तारण किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अनुसार इस विशेष लोक अदालत ने यह साबित किया है कि संवाद, समझाइश और आपसी सहमति से वर्षों पुराने विवादों का भी स्थायी समाधान संभव है। लोक अदालत के माध्यम से पक्षकारों को त्वरित, सरल, सुलभ और कम खर्च में न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।