तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सीनीयर लीडर चंद्रिमा भट्टाचार्य ने नियुक्ति के महज एक महीने बाद पश्चिम बंगाल प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने पार्टी के अन्य सभी पद भी छोड़ दिए है। उनके बागी गुट में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं। चंद्रिमा भट्टाचार्य ने कहा कि उन्होंने यह फैसला ममता बनर्जी की फोन पर की गई नाराजगी के बाद लिया। ममता ने उन पर आरोप लगाया था कि चंद्रिमा ने बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को कोलकाता में पार्टी मुख्यालय 'तृणमूल भवन' पर कब्जा करने दिया। दरअसल शुक्रवार को ऋतब्रत बनर्जी और बागी नेताओं ने पार्टी हेडक्वार्टर पर कब्जा कर लिया था। बागी नेताओं ने ऐलान किया था कि अब वे यहीं से काम करेंगे। उस समय चंद्रिमा भवन में मौजूद थीं, लेकिन कुछ देर बाद वहां से चली गईं। इस्तीफे के बाद बागी नेताओं से मुलाकात चंद्रिमा भट्टाचार्य तीन बार विधायक रह चुकी हैं, लेकिन 2026 के विधानसभा चुनाव में उन्हें दमदम उत्तर सीट से भाजपा के सौरव सिकदार ने हरा दिया था। इस्तीफे के कुछ ही देर बाद चंद्रिमा को विधानसभा में बागी गुट के नेताओं के साथ देखा गया। हालांकि उन्होंने कहा कि वह केवल पूर्व विधायक के तौर पर कुछ कागजी काम से विधानसभा गई थीं और विपक्ष के कमरे में बैठने का मतलब यह नहीं है कि वह बागी गुट में शामिल हो रही हैं। उन्होंने कहा कि अभी उन्होंने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर कोई फैसला नहीं किया है। बेटे पहले ही बागी खेमे में शामिल चंद्रिमा के बेटे और कोलकाता नगर निगम के पूर्व पार्षद सौरव बसु कुछ सप्ताह पहले ही बागी खेमे में शामिल हो चुके हैं। वह भी विधानसभा में बागी नेताओं की बैठक में मौजूद थे।