भादरा में फर्जी बायोमेट्रिक से आधार कार्ड बनाने वाले गिरोह का मामला महज धोखाधड़ी नहीं, बल्कि देश की आंतरिक सुरक्षा से का खतरा बनकर सामने आया है। एटीएस की जांच में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि इस सेंटर पर बने 79% आधार कार्ड दूसरे राज्यों के लोगों के हैं और सिर्फ 21% स्थानीय। वहीं, जांच एजेंसियों के लिए सबसे बड़ा सवाल बन गया है- आखिर देशभर से लोग भादरा ही क्यों पहुंच रहे थे? जांच में यह भी सामने आया है कि फर्जी आधार कार्डों से नाम और पते बदलकर पासपोर्ट बनवाए गए और कई संदिग्ध विदेश फरार हो चुके हैं। एटीएस अब इस पूरे नेटवर्क को जोड़ने में जुटी है और 150 से अधिक संदिग्धों की प्रोफाइल खंगाली जा रही है। फर्जीवाड़े के 5 बड़े खुलासे बाहरी राज्यों की असामान्य भीड़ - सेंटर से बने 79% आधार कार्ड दूसरे राज्यों के लोगों के सामान्य प्रक्रिया के उलट यह पैटर्न जांच का सबसे बड़ा आधार बना। पहचान बदलकर विदेश भागे संदिग्ध - नाम-पता बदलकर बनाए गए आधार कार्ड से पासपोर्ट बने, कई लोग देश छोड़ चुके। बायोमीट्रिक सिस्टम से खिलवाड़ - रबर के डमी फिंगरप्रिंट और आंखों की रेटिना के प्रिंट से UIDAI सिस्टम को चकमा दिया गया। सिस्टम पर सवाल - एक व्यक्ति का एक ही आधार बन सकता है, फिर ये 150 लोग कौन हैं? क्या यह बायोमेट्रिक सिस्टम को हैक करने वाला बड़ा नेटवर्क है? मुख्य आरोपी रिमांड पर - मुख्य आरोपी कुलदीप शर्मा 24 अप्रैल तक पुलिस रिमांड पर है। संदिग्धों के नेटवर्क को लेकर पूछताछ जारी है। संदिग्ध केंद्र बंद, एक साल के सभी डेटा की जांच शुरू एटीएस ने यूआईडीएआई को सूचना देकर भादरा और आसपास के संदिग्ध आधार केंद्रों को तुरंत बंद करवा दिया है। अब पिछले एक साल के सभी एनरोलमेंट डेटा की गहन जांच की जा रही है, ताकि पूरे नेटवर्क की परतें खुल सकें, और आरोपियों को पकड़ा जा सके। लैपटॉप की फॉरेंसिक जांच में खुलेंगे राज जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस फर्जीवाड़े से कहीं स्लीपर सेल या संगठित अपराधियों को नई पहचान तो नहीं दी गई। आरोपी के मोबाइल और लैपटॉप की फॉरेंसिक जांच से बड़े खुलासों की उम्मीद है। एटीएस की टीमें भादरा और हनुमानगढ़ में डेरा डाले हुए हैं और पूरे ऑपरेशन की मॉनिटरिंग वरिष्ठ अधिकारी कर रहे हैं।