परिवार जिन दो अपनों को सालों पहले मरा हुआ मान चुका था, वे अचानक जिंदा मिल गए। मानसिक बीमारी के कारण घर से बिछड़े दोनों लोगों का अपने परिवार से संपर्क टूट गया था। परिजनों ने गुमशुदगी दर्ज कराई, हर जगह तलाश की, लेकिन जब कोई सुराग नहीं मिला तो उम्मीद छोड़ दी। भरतपुर के अपना घर आश्रम में इलाज के बाद दोनों की याददाश्त लौटी तो उन्होंने अपने घर का पता बताया। इसके बाद जब सालों बाद परिवार आमने-सामने आया तो खुशी के आंसू नहीं रुके। किसी की पत्नी को 12 साल बाद पति मिला, तो किसी भाई को 20 साल बाद अपना बिछड़ा भाई वापस मिल गया। पहली कहानी… 12 साल बाद विक्रम अपने परिवार से मिला 1. मजदूरी करने दिल्ली गए, फिर परिवार से संपर्क टूट गया अपना घर आश्रम के सचिव नरेंद्र तिवारी ने बताया कि उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर निवासी विक्रम वर्ष 2013 में दिल्ली मजदूरी करने निकले थे। उस समय उनका मानसिक बीमारी का इलाज चल रहा था। कुछ दिन दिल्ली में रहने के बाद उनका परिवार से संपर्क टूट गया। 2. परिवार ने गुमशुदगी दर्ज कराई, फिर मान लिया कि अब नहीं रहे विक्रम के लापता होने पर परिजनों ने सिद्धार्थनगर में गुमशुदगी की FIR दर्ज करवाई। रिश्तेदारों और कई जगह तलाश की, लेकिन उनका कोई पता नहीं चला। समय बीतने के साथ परिवार ने मान लिया कि विक्रम की मौत हो चुकी है। घर पर पत्नी निर्मला, 2 साल का बेटा अंशु और 9 साल की बेटी उषा थे। पति के गायब होने के बाद निर्मला ने मजदूरी कर दोनों बच्चों का पालन-पोषण किया। काफी संघर्ष के बाद बच्चे बड़े हुए और काम करने लगे। तब तक परिवार ने विक्रम के लौटने की उम्मीद छोड़ दी थी। 3. दिल्ली से रेस्क्यू कर भरतपुर लाया गया 29 जुलाई 2018 को अपना घर आश्रम की टीम ने दिल्ली के कच्छावला इलाके से विक्रम को रेस्क्यू किया। उस समय वह गंभीर रूप से बीमार, कुपोषित और असहाय थे। वह चल भी नहीं पा रहे थे और टीबी से भी पीड़ित थे। इसके बाद उन्हें भरतपुर के अपना घर आश्रम लाकर इलाज शुरू किया गया। 4. इलाज के बाद याद आया घर, परिवार से मिलते ही छलक पड़े आंसू लगातार इलाज के बाद विक्रम की मानसिक हालत में सुधार हुआ। करीब 8 दिन पहले उन्होंने अपने घर की जानकारी दी। आश्रम ने परिवार से संपर्क किया तो पहले किसी को विश्वास नहीं हुआ कि विक्रम जिंदा हैं। वीडियो कॉल पर बात कराने के बाद गुरुवार को उनके भाई विष्णु और पत्नी निर्मला आश्रम पहुंचे। 12 साल बाद विक्रम को जिंदा देखकर परिवार की आंखों में आंसू आ गए। दूसरी कहानी… 20 साल बाद राजू लौटे अपने घर 1. सूरत में काम करने निकले, फिर हो गए लापता छिंदवाड़ा निवासी राजू वर्ष 2006 में सूरत में काम करने की बात कहकर घर से निकले थे। उनकी शादी नहीं हुई थी और उस समय वह मानसिक रूप से बीमार भी थे। सूरत पहुंचने के बाद उनका परिवार से संपर्क पूरी तरह टूट गया। 2. गुमशुदगी दर्ज कराई, परिवार ने मान लिया कि मौत हो गई परिवार ने राजू की काफी तलाश की। गुमशुदगी की FIR भी दर्ज करवाई और कई जगह जानकारी जुटाई, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला। लंबे समय तक तलाश के बाद परिवार ने मान लिया कि राजू अब इस दुनिया में नहीं हैं। 3. सूरत से रेस्क्यू कर आश्रम लाया गया अगस्त 2019 में मानव चैरिटेबल ट्रस्ट ने राजू को सूरत से रेस्क्यू किया। उसी महीने उन्हें भरतपुर के अपना घर आश्रम भेज दिया गया। शुरुआत में वह अपने घर या परिवार के बारे में कोई जानकारी नहीं दे पा रहे थे। आश्रम में उनका लगातार इलाज किया गया। 4. 20 साल बाद भाई भी नहीं पहचान पाए करीब 7 दिन पहले राजू ने अपने परिवार की जानकारी आश्रम प्रशासन को दी। इसके बाद टीम ने उनके भाई गोपी से संपर्क किया। गुरुवार को गोपी, चचेरे भाई अर्जुन, परशु और आनंद उन्हें लेने आश्रम पहुंचे। करीब 20 साल बाद मिलने पर भाई पहले राजू को पहचान ही नहीं पाए। काफी देर बातचीत के बाद उन्हें यकीन हुआ कि सामने खड़ा व्यक्ति उनका ही राजू है। इसके बाद परिवार की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।