भीलवाड़ा में करंट लगने से मौत होने पर 15 साल की बच्ची के परिवार को अजमेर विद्युत वितरण निगम (AVVNL) को 6 लाख 4 हजार की राशि देनी होगी। पिता ने कहा- राशि मायने नहीं रखती, अधिकारियों ने बेटी की लापरवाही का आरोप लगा कर मामला निपटाने की कोशिश की थी। ऐसे में, कोर्ट में 5 साल लड़ाई लड़नी पड़ी। अब कोर्ट ने इसे निगम की लापरवाही माना है। मामला भीलवाड़ा के शास्त्री नगर में माहेश्वरी भवन के सामने वाली गली का है। यहां ओमप्रकाश शर्मा का मकान है। यही उनकी बेटी की मकान के सामने से गुजर रही 11 केवी बिजली की लाइन के चपेट में आने से मौत हुई थी। एडवोकेट राजेश शर्मा ने बताया कि शास्त्री नगर में रहने वाली पूनम की बिजली विभाग की लापरवाही के चलते करंट लगने से मौत हो गई थी। प्रशासन और निगम द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं करने पर पूनम के पिता ने कोर्ट की शरण ली। अब 5 साल बाद उन्हें न्याय मिला। कोर्ट ने अजमेर विद्युत वितरण निगम के खिलाफ अवार्ड पारित करते हुए परिजनों को क्षतिपूर्ति के रूप में 6 लाख 4 हजार और उसे पर ब्याज चुकाने के आदेश दिए। बेटी को मौत का जिम्मेदार बता दिया एडवोकेट राजेश शर्मा ने बताया कि पूनम की मौत के बाद से पिता लगातार न्याय के अधिकारियों की गुहार लगा रहे थे लेकिन, अधिकारियों ने पूनम की मौत को उसी की लापरवाही के चलते होना बताया था। बिजली निगम के तत्कालीन एसई एस के उपाध्याय ने बताया था कि जांच रिपोर्ट साक्षी और मौके की स्थिति के अनुसार रिपोर्ट बनाई गई थी। जिसमें लापरवाही के चलते करंट लगा था। हमे मुआवजा नहीं न्याय की उम्मीद थी इधर पीड़ित परिवार का कहना है कि हमें मुआवजा नहीं चाहिए लेकिन हमारी बेटी पर लापरवाही के आरोप लगाना सरासर गलत है पिता ओमप्रकाश का कहना है कि वो मुझे खाना परोस कर बाहर आई थी और अचानक बाहर से उसके चीखने की आवाज आई,मैं पहुंचा तब तक वो बेहोश हो चुकी थी,अपनी बेटी को खोने का दर्द कभी नहीं भूल सकता।बिजली निगम ने मेरी बेटी को ही उसकी मौत का दोषी ठहरा दिया,हादसा बिजली के तारों का कारण हुआ था समय पर अगर बिजली का खंभा लग जाता और 11 हजार केवी की लाइन के तारों को पैक कर दिया जाता तो आज मेरी बेटी मेरे साथ होती। पांच साल बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिला एडवोकेट राजेश शर्मा ने बताया कि शास्त्री नगर में रहने वाली पूनम की बिजली विभाग की लापरवाही के चलते करंट लगन से डेथ हो गई थी।प्रशासन और निगम द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं करने पर पूनम के पिता ने कोर्ट की शरण ली और अब 5 साल बाद उन्हें न्याय मिला। कोर्ट ने अजमेर विद्युत वितरण निगम के खिलाफ अवार्ड पारित करते हुए परिजनों को क्षतिपूर्ति के रूप में 6 लाख 4 हजार और उसे पर ब्याज चुकाने के आदेश दिए।