भीलवाड़ा नगर विकास न्यास (UIT) में 492 प्लॉटों की फाइलें गायब होने के मामले को लेकर सोमवार को कांग्रेस ने प्रदर्शन किया। मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने यूआईटी सचिव को ज्ञापन सौंपा। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि करीब 200 करोड़ रुपए की सरकारी संपत्ति का हेरफेर किया गया है। साथ ही चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। ज्ञापन में बताया कि UIT प्रशासन द्वारा जारी की गई जानकारी और उजरदारी प्रक्रिया के दौरान यह बात सामने आई है कि 492 प्लॉटों का ब्योरा प्रॉपर्टी रजिस्टर में तो दर्ज है, लेकिन इनकी मूल फाइलें न्यास के पास उपलब्ध नहीं हैं। भूखंड की औसतन कीमत 40 लाख रुपए पीसीसी मेंबर मनोज पालीवाल और प्रदर्शनकारियों ने कहा कि क्षेत्र में एक भूखंड की औसतन कीमत कम से कम 40 लाख रुपए है। इस लिहाज से 200 करोड़ रुपए की बेशकीमती संपत्ति में बड़ा घोटाला हुआ है, जिस पर प्रशासन चुप्पी साधे बैठा है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि इतने बड़े आर्थिक घोटाले के बावजूद न तो कोई जांच कमेटी बनाई गई और न ही किसी अधिकारी या कर्मचारी पर कोई कार्रवाई हुई। प्रशासन ने केवल समाचार पत्रों में आम सूचना प्रकाशित करवाकर महज खानापूर्ति की है। इससे साफ जाहिर होता है कि दोषियों को बचाने और उन्हें क्लीन चिट देने का प्रयास किया जा रहा है। जबकि सरकार में एक रुपए की वित्तीय गड़बड़ी पर भी सख्त रुख अपनाया जाता है। प्रदर्शनकारी बोले- भ्रष्टाचारियों की जेब में गई रकम प्रदर्शनकारियों ने कहा कि UIT एक स्वायत्त संस्था है और यह 200 करोड़ रुपए यदि न्यास के खजाने में आते, तो भीलवाड़ा शहर के कई विकास कार्य पूरे हो सकते थे। लेकिन यह पूरी राशि भ्रष्टाचारियों की जेब में चली गई। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि इस पूरे प्रकरण की तत्काल उच्च स्तरीय जांच करवाकर दोषियों को जेल भेजा जाए, वरना भीलवाड़ा में बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।