राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड की ओर से सप्लाई किए गए 20 करोड़ रुपए के घटिया ग्लूकोमीटर ने 2 साल में करीब 15 हजार स्वस्थ मरीज को डायबिटीज का ‘मरीज’ बना डाला। यह खुलासा जयपुर, भरतपुर, सीकर, झालावाड़, डीग और चौमूं सहित प्रदेश के 20 सरकारी अस्पतालों में मरीजों की जांच में हुआ है। यह जांच रिपोर्ट चिकित्सा विभाग की टीम ने तैयार की है। इस रिपोर्ट के बाद भी ग्लूकोमीटर सप्लाई करने वाली कंपनी सेंसाकोर मेडिकल इंस्ट्रूमेंटेशन प्रा. लि. पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। डायबिटीज के बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार ने शुरुआती स्तर पर ही जांच के आदेश दिए थे। इसके लिए अस्पतालों में 20 करोड़ रुपए के ग्लूकोमीटर सप्लाई किए गए। रिपोर्ट को लेकर सवाल उठे तो चिकित्सा विभाग ने जांच शुरू कराई। जयपुर सहित पूरे प्रदेश में सीएमएचओ और पीएमओ स्तर पर जांच कराई गई। जांच के दौरान हजारों मरीजों की रिपोर्ट में इन ग्लूकोमीटर से गलत रीडिंग सामने आई। सभी जिलों से चिकित्सा विभाग को रिपोर्ट सौंपी गई। आरएमएससीएल का एक और भ्रष्टाचार; कुछ मरीजों की तीन गुना तो कुछ की शून्य रीडिंग केस 1: डायबिटीज की सामान्य रेंज 80 से 110 एमजी/डीएल होती है। सरकारी अस्पतालों में सप्लाई किए गए ग्लूकोमीटर की जांच में 45 साल के एक मरीज की रीडिंग 133 एमजी/डीएल बताई गई। हालांकि उसका शुगर लेवल 75 एमजी/डीएल था। ऐसे में उसे करीब दो साल तक शुगर की दवाएं खानी पड़ीं। केस 2: इसी तरह नंदकिशोर की 160 की जगह 266 और मनदीप की 112 की जगह 167 एमजी/डीएल रीडिंग बताई गई। यह केवल सरकारी जांच के उदाहरण हैं, जबकि वास्तविकता में हजारों लोगों की रिपोर्ट गलत पाई गई है। आरएमएससीएल अधिकारी न केवल कार्रवाई से बच रहे हैं, बल्कि सरकार के निर्देशों की भी अनदेखी कर रहे हैं। चार माह बाद ही मल्टीपेरा मॉनिटर में करोड़ों के घालमेल के मामले में एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई। भास्कर एक्सपर्ट डॉ. प्रवीण मंगलूनिया, डॉ. पुनीत सक्सेना यदि किसी व्यक्ति को डायबिटीज नहीं है और वह दवा लेता है तो एक अंतराल बाद (दो से पांच महीने के बीच) पेट में दर्द, डायरिया, मांसपेशियों में दर्द जैसी परेशानी हो सकती है। विटामिन बी12 की कमी, स्किन पर रेशे और वजन बढ़ सकता है। मेटफार्मिन से शुगर लेवल काफी कम हो जाता है, ऐसे में व्यक्ति बेहोश होने से लेकर कोमा तक में जा सकता है। फिलहाल, मैंने रिपोर्ट नहीं देखी है। अगर कोई गड़बड़ी है तो मामले की जांच कराई जाएगी। जो भी जिम्मेदार होगा, कार्रवाई होगी। -गायत्री राठौड़, हेल्थ सेक्रेट्री