बीकानेर में एक किसान परिवार ने हिरण को बच्चे की तरह पाला। डेढ़ साल तक उसका ख्याल रखा। उसे बोतल से दूध पिलाया। बच्चे उसके साथ खेलते। हिरण के बच्चे की मां को कुत्तों ने मार दिया था। सोमवार को श्रीसनातन धर्मा गोसेवा मरुधर थार संस्था की टीम हिरण के बच्चे को लेने किसान हनुमानराम मेघवाल के घर पहुंची। परिवार ने तिलक लगाकर और मिश्री खिलाकर उसे विदा किया। इस दौरान किसान की पत्नी से लेकर बच्चे तक फूट-फूटकर रोने लगे। मामला बीकानेर के कोलायत के ग्रांधी गांव का है। परिवार ने हिरण के बच्चे का नाम ‘कमल’ रखा था। गोसेवा संस्था ने हिरण के बच्चे को नोखा के पास समराथल धोरा मुकाम में छोड़ दिया। देखिए, हिरण की विदाई की PHOTOS… किसान के बच्चे और पत्नी करते थे देखभाल संस्था के संचालक ओम फौजी ने बताया- हनुमानराम के खेत के पास करीब डेढ़ साल पहले एक मादा हिरण का कुत्तों ने मार डाला था। हिरण का बच्चा अपनी मां के आसपास घूम रहा था। तभी हनुमानराम की नजर उस पर पड़ी। कुत्ते हिरण के बच्चे को न मार दें, इसलिए हनुमानराम उसे अपने घर ले आए थे। जब हनुमानराम हिरण के बच्चे को लेकर घर पहुंचे तो उनके दोनों बेटे गिरधारी, पवन और बेटी तुलसी काफी खुश हुए। ढाणी में ही हिरण के बच्चे के लिए एक छोटा कमरा रखा। किसान की पत्नी केसर अपने बच्चे की तरह इसकी देखभाल करने लगी। दूध की बोतल से उसे बकरी का दूध पिलाती और दिनभर उसका ख्याल रखने लगी। परिवार का हिरण के बच्चे से इतना लगाव हो गया कि बच्चे दिनभर उसी के साथ खेलते थे। यहां तक कि ढाणी से बाहर भी जाना होता तो उसे अकेला नहीं छोड़ते थे। उसे अपने साथ लेकर जाते थे। गले में घंटी बांधी, पिकअप में बैठाकर विदा किया हनुमानराम ने बताया कि हिरण के बड़ा होने पर सींग निकल आए थे। ऐसे में उसके चोट लगने की आशंका बढ़ गई थी। परिवार के लोगों को भी डर सताने लगा था कि कहीं भाग गया या किसी ने शिकार कर लिया तो परेशानी बढ़ सकती है। इस पर परिवार ने श्रीसनातन धर्म गोसेवा मरुधर थार संस्था से संपर्क किया। सोमवार को संस्था के लोग हिरण के बच्चे को लेने पहुंचे। बच्चों ने विदाई से पहले उसे दूध पिलाया और साथ में खेले। यही नहीं, उसके गले में घंटी भी बांधी। जब उसे पिकअप में बैठाया जा रहा था तो पूरा परिवार उसे छोड़ने पहुंचा। पहले भी कर चुके हैं ऐसा रेस्क्यू ओम फौजी ने बताया कि यह पहला मौका नहीं है। इससे पहले भी कई बार लोगों ने अनाथ हिरण के बच्चों को अपने घर में पालने के बाद बड़ा होने पर प्राकृतिक आवास में छोड़ा है। भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित मोडायत गांव में मदनलाल ठेकेदार ने भी इसी तरह एक हिरण के बच्चे का पालन-पोषण कर उसे समराथल धोरा में छोड़ा था। वीडियो इनपुट: शिवम लखारा, बज्जू …. ये खबर भी पढ़ें… 6 महीने बाद भी आवाज सुनते ही दौड़ा आया हिरण:कॉन्स्टेबल ने कुत्तों से बचाकर बेटे की तरह पाला था, 6 महीने बाद भी नहीं भूला बेजुबान हिरणू नाम सुनते ही दर्जनों हिरणों के झुंड में घूम रहा हिरण दौड़ता हुआ आ गया। पास में खड़े युवक से अठखेलियां करने लगा। इस दृश्य को देखकर वहां मौजूद लोग हैरान रह गए। हिरण का प्यार देख युवक भी भावुक हो गया। (यहां पढ़ें पूरी खबर) हिरण की 'बहन' बनी 11 साल की बच्ची:चार महीने पाला, गोद में खिलाया; बिछड़ने पर छलक पड़े आंसू जैसलमेर में 11 साल की बच्ची पूजा ने 'मां' की तरह हिरण के बच्चे को पाला। 4 महीने तक उसका पूरा ख्याल रखा। रविवार को वन विभाग की टीम जब हिरण के बच्चे को लेने आई तो पूजा ने उसे गले लगा लिया। वह बिछड़ने का दर्द सहन नहीं कर पाई। उसकी आंखों से आंसू बह निकले। (यहां पढ़ें पूरी खबर)