राजस्थान सरकार की ओर से कर्मचारियों के समर्पित (सरेंडर) उपार्जित अवकाश के नकद भुगतान में हो रही देरी लाखों कर्मचारियों पर भारी पड़ रही है। प्रदेश के करीब सात लाख कर्मचारियों के 15 दिन के समर्पित अवकाश के बिल ट्रेजरी से पारित होने के बावजूद तीन महीने से भुगतान लंबित है। कर्मचारी संगठनों का दावा है कि देरी से प्रत्येक कर्मचारी को औसतन 1,280 रुपए का आर्थिक नुकसान हुआ है और कुल नुकसान करीब 89.60 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। अधिकांश कर्मचारियों ने अप्रैल 2026 में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए समर्पित अवकाश के नकद भुगतान का आवेदन किया था। विभागों ने बिल तैयार कर कोष कार्यालय भेजे, जहां उन्हें पारित भी कर दिया गया, लेकिन अब तक राशि कर्मचारियों के खातों में नहीं पहुंची। इसी दौरान 1 जुलाई से वार्षिक वेतन वृद्धि लागू हो गई। यदि भुगतान समय पर हो जाता या आवेदन जुलाई में किया जाता तो कर्मचारियों को बढ़े हुए मूल वेतन के आधार पर अधिक राशि मिलती।