​भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर स्तंभ और आदिवासी समाज के मुखर स्वर नवनीत लाल निनामा का आज निधन हो गया। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे जिले में शोक की लहर दौड़ गई। उन्होंने ने 87 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। वह लंबे समय से अस्वस्थ थे, उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। वे 1963 से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय थे और उन्हें बांसवाड़ा में जनसंघ और भाजपा को सींचने वाला मुख्य सूत्रधार माना जाता था। ​कल सुबह 9 बजे गननावट में अंतिम संस्कार उनकी अंतिम शवयात्रा 24 अप्रैल 2026, बुधवार को प्रातः 9 बजे उनके पैतृक गांव गननावट से निकाली जाएगी। भाजपा के कई नेताओं और आदिवासी समाज के हजारों लोगों के इस अंतिम विदाई में शामिल होने की संभावना है। निनामा ने अपने करियर की शुरुआत 1963 में पंचायत पडौली गोर्धन, तहसील घाटोल के सचिव के रूप में की थी। वहां से शुरू हुआ गरीबों के हक की लड़ाई का सिलसिला राजनीति के शीर्ष तक पहुंचा। लोकतंत्र की रक्षा के लिए वे जनवरी 1976 से जुलाई 1977 तक मीसा के तहत जेल में रहे। उन्होंने अपने जीवनकाल में घाटोल की 50 बेटियों का कन्यादान कराया और लगभग 100 निर्धन विद्यार्थियों की शिक्षा का जिम्मा उठाया। ​आदिवासी समाज के प्रहरी के रूप में पहचान निनामा केवल राजनीतिक व्यक्ति नहीं थे, बल्कि राजस्थान प्रदेश आदिवासी संघ के माध्यम से वे पिछले 45 वर्षों से समाज की आर्थिक और धार्मिक समस्याओं के समाधान में जुटे थे। 1979 से 1990 तक उन्होंने राजस्थान आदिवासी संघ के अध्यक्ष के रूप में आदिवासियों की आवाज को जयपुर और दिल्ली तक बुलंद किया। ​राजनीतिक कद: एक नजर में भाजपा परिवार ने कहा कि उन्होंने उस दौर में पार्टी का झंडा थामा था जब संसाधन शून्य थे। उनका जाना एक अपूरणीय क्षति है।