भारत की ऊर्जा सुरक्षा में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। पचपदरा स्थित देश की पहली अत्याधुनिक बीएस-6 मानक वाली एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड का उद्घाटन 21 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। पचपदरा स्थित एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी अपनी 9 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष क्षमता के साथ न केवल तेल साफ करेगी, बल्कि पेट्रोकेमिकल उत्पादन में देश को आत्मनिर्भर बनाएगी। पचपदरा रिफाइनरी की सबसे बड़ी खासियत इसका नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स (NCI) है। यह लगभग 17 है। तकनीकी भाषा में इसका मतलब है कि यह देश की सबसे उन्नत, हाई-कन्वर्जन रिफाइनरी है। यह दुनिया के किसी भी कोने से आने वाले भारी, निम्न गुणवत्ता वाले कच्चे तेल को भी बेशकीमती पेट्रोल, डीजल, पेट्रोकेमिकल में बदलने की क्षमता रखती है। पचपदरा में दिखेगी विदेशी तकनीक और आत्मनिर्भर भारत की ताकत आत्मनिर्भर भारत का जीवंत उदाहरण देते हुए इस रिफाइनरी के अधिकांश रिएक्टर, कॉलम, भारी टैंक भारत में ही बने हैं। हालांकि, इसका दिमाग यानी कंट्रोल सिस्टम, हाई-प्रेशर कंप्रेसर के लिए अमेरिका, जापान, यूरोप की तकनीक का सहारा लिया गया है। वहीं, इसकी फिनिशिंग, वेल्डिंग की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय स्तर की बनाए रखने के लिए नीदरलैंड के विशेषज्ञ तकनीशियनों ने पचपदरा की तपती धूप में पसीना बहाया है। कच्चे तेल की प्रकृति वैक्सी (मोम जैसी) होती है। इसे पाइपलाइन में जमने से रोकने के लिए मुंद्रा से पचपदरा तक एक विशेष हीटिंग पाइपलाइन बिछाई गई है। आंकड़ों में रिफाइनरी का कार्य लोहा व स्टील: लाखों टन स्ट्रक्चरल स्टील और एलॉय स्टील का जाल। तांबा: हजारों किलोमीटर की केबलिंग और मोटरों में कॉपर का अधिक उपयोग। पानी: प्रतिदिन 40,000 से 60,000 क्यूबिक मीटर पानी की जरूरत। जीरो डिस्चार्ज: पर्यावरण के लिए जीरो लिक्विड डिस्चार्ज तकनीक। एक बूंद पानी बर्बाद नहीं होगा। कंपनियों का बड़ा विजन इस मेगा प्रोजेक्ट के पीछे दुनिया के सबसे बड़े तकनीकी दिमाग काम कर रहे हैं। इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड इसकी कमान संभाल रही है। लमस टेक्नोलॉजी, यूओपी, यूनिवेशन टेक्नोलॉजीज जैसी कंपनियों ने अपनी पेट्रोकेमिकल, क्रैकर यूनिट्स की तकनीक दी है। औद्योगिक क्रांति शुरू रिफाइनरी शुरू होते ही राजस्थान केवल कच्चा तेल निकालने वाला राज्य नहीं रहेगा। वह उसे प्रोसेस कर वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट बनाने वाला हब बन जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर प्लास्टिक, केमिकल उद्योगों की बाढ़ आएगी।