उदयपुर की भूपाल नोबल्स यूनिवर्सिटी में विद्या प्रचारिणी सभा के मैनेजमेंट ऑफिस में करीब 14 दिनों से लगे ताले जिला प्रशासन मंगलवार को भी नहीं खुलवा सका। पूर्व कार्यकारिणी सदस्यों ने सुबह अकाउंट ऑफिस का ताला खोल दिया लेकिन रजिस्ट्रार, प्रबंध निदेशक और मंत्री ऑफिस का ताला नहीं खोला गया। मौके पर गिर्वा तहसीलदार श्यामसिंह चारण, डीएसपी सूर्यवीर सिंह पहुंचे। जिनसे एडहॉक कमेटी पदाधिकारियों ने ताला खुलवाने की मांग की। पदाधिकारियों का कहना था कि ऑफिस में ताला लगा होने से यूनिवर्सिटी का काम प्रभावित हो रहा है। इस पर पुलिस प्रशासन ने उन्हें जल्द ताला खोले जाने का आश्वासन दिया। वहीं, किसी भी तरह के विवाद की संभावना को देखते हुए अहतियातन सभा के मुख्य ऑफिस के बाहर सुबह से शाम तक पुलिस जाब्ता तैनात रहा। ताले खुलवाने में सकारात्मक नहीं है प्रशासन: देवेन्द्र शक्तावत एडहॉक कमेटी के वरिष्ठ सदस्य देवेन्द्र शक्तावत ने बताया कि पूर्व कार्यकारिणी सदस्यों ने सुबह जिस अकाउंट ऑफिस का ताला खोला। उसे खोले जाने का कोई मतलब नहीं है। रजिस्ट्रार, एमडी और मंत्री ऑफिस के ताले खुलने चाहिए। एक दिन पूर्व की वार्ता में प्रशासन ने हमें कब्जा दिलाने का आश्वासन दिया था लेकिन प्रशासन की कोई सकारात्मक भूमिका नजर नहीं आ रही। प्रशासन ने हमें दो दिन का समय दिया है। हम कल का भी इंतजार करेंगे। महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब करने की शिकायत दर्ज एडहॉक कमेटी सदस्यों ने सभा के मैनेजमेंट ऑफिस से महत्वपूर्ण दस्तावेजों को गायब करने का आरोप लगाते हुए भूपालपुरा थाने में शिकायत दर्ज कराई है। इसमें बताया कि 14 और 15 अप्रैल को सुबह करीब 7 से 8 बजे के बीच दस्तावेज गायब किए गए। ताकि ऑडिट में दस्तावेज पेश नहीं हो सके। सदस्यों ने कानूनी कार्रवाई की मांग की है। चार्ज के लिए बनी है टकराव ​की स्थिति बता दें कि पूर्व कार्यकारिणी का कार्यकाल 12 फरवरी को समाप्त हो चुका था। इसके बाद चुनाव होने थे, लेकिन पूर्व कार्यकारिणी द्वारा करीब 54 नए सदस्य जोड़ने को लेकर विवाद हो गया था। ऐसे में जो सभा के सदस्य नहीं बन सके, वे कोर्ट चले गए थे। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि सभा के प्रधान संरक्षक और अध्यक्ष विश्वराजसिंह मेवाड़ इस संबंध में निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं। इसके बाद प्रधान संरक्षक मेवाड़ ने एडहॉक कमेटी का गठन किया था, जिन्हें चार्ज लेकर ऑडिट कराने की जिम्मेदारी दी गई थी। वर्तमान चार्ज संभाल रही कार्यकारिणी इसके लिए राजी नहीं है। ऐसे में एडहॉक कमेटी और पूर्व कार्यकारिणी में टकराव की​ स्थिति बनी हुई है।