भास्कर न्यूज | बूंदी उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत जिले ने प्रदेश में नई पहचान बनाई है। जिले ने असाक्षरों की पहचान के लिए घर-घर सर्वे सबसे पहले पूरा कर प्रथम स्थान प्राप्त किया है। अभियान के तहत जिले को 64 हजार से अधिक असाक्षरों को चिन्हित कर साक्षर बनाने का लक्ष्य मिला था, जिसे समयबद्ध तरीके से पूरा किया गया। जिला साक्षरता अधिकारी योगेशकुमार शर्मा ने बताया कि राज्य सरकार और साक्षरता निदेशालय के निर्देश पर जिले के सभी पांचों ब्लॉकों में व्यापक सर्वे अभियान चलाया गया। सर्वेयर शिक्षकों ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, प्रेरकों और स्थानीय स्वयंसेवकों के सहयोग से घर-घर पहुंचकर लाभार्थियों का नाम, आयु और आधार संबंधी जानकारी मोबाइल एप पर दर्ज की। सहायक परियोजना अधिकारी अंकित गौतम ने बताया कि जिला शिक्षा अधिकारी, ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों और पांचों ब्लॉकों के साक्षरता समन्वयकों ने टीम भावना से काम किया। सभी के सामूहिक प्रयास से प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया। अभियान का उद्देश्य 15 वर्ष या उससे अधिक आयु के ऐसे लोगों को साक्षरता से जोड़ना है, जो किसी कारण औपचारिक शिक्षा से वंचित रह गए। उन्हें अक्षर ज्ञान के साथ वित्तीय और डिजिटल साक्षरता भी दी जाएगी, ताकि वे आत्मनिर्भर बनकर समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें। प्रदेश में सबसे पहले पूरा किया सर्वे कार्य। 64 हजार से अधिक असाक्षरों की पहचान का लक्ष्य पूरा। पांचों ब्लॉकों में घर-घर जाकर हुआ सर्वे। शिक्षकों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, प्रेरकों और स्वयंसेवकों ने निभाई अहम भूमिका। लाभार्थियों का पूरा विवरण मोबाइल एप पर ऑनलाइन दर्ज किया गया। अब चिन्हित असाक्षरों को अक्षर ज्ञान के साथ वित्तीय और डिजिटल साक्षरता दी जाएगी। ^ यह उपलब्धि जिले के सभी सर्वेयर शिक्षकों, साक्षरता समन्वयकों, प्रशासन, स्वयं सेवकों और नागरिकों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। बूंदी ने पूरे प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त कर नई मिसाल पेश की है। -योगेश कुमार शर्मा, जिला साक्षरता अधिकारी, बूंदी