राज्य सरकार के 'शहरी सेवा शिविर-2026' और 'ग्रामीण सेवा शिविर' बूंदी जिले में आमजन के लिए राहत का माध्यम बन रहे हैं। बूंदी, तालेड़ा और हिण्डोली में गुरुवार को आयोजित शिविरों में सालों से लंबित भूमि विवाद, पेंशन और विवाह पंजीयन जैसे मामलों का मौके पर ही समाधान किया गया। कई लाभार्थियों को एक ही दिन में जरूरी दस्तावेज और अधिकार मिलने से सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत मिली। विवाह प्रमाण-पत्र मिला, दंपती की चिंता हुई दूर बूंदी नगर परिषद में लगे शहरी सेवा शिविर में गुलशन राठौर और किरण राठौर दंपती को आवेदन के तुरंत बाद विवाह पंजीयन प्रमाण-पत्र जारी किया गया। दंपती को नए पासपोर्ट, बैंक में संयुक्त खाता खुलवाने और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए इस प्रमाण-पत्र की आवश्यकता थी। सालों तक प्रक्रिया में लगने वाले समय को लेकर चिंतित दंपती को मौके पर ही प्रमाण-पत्र मिलने से बड़ी राहत मिली। उन्होंने त्वरित समाधान के लिए राज्य सरकार और नगर परिषद का आभार व्यक्त किया। सालों पुराना भूमि विवाद सुलझा, किसानों को मिला अधिकार तालेड़ा उपखंड की ग्राम पंचायत बल्लोप में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर में किसानों मुकेश, मोहन और विकास की सालों से लंबित भूमि विवाद संबंधी समस्या का समाधान किया गया। भूमि खातों के आपसी विभाजन के अभाव में जमाबंदी में त्रुटियां थीं, जिससे किसानों को अपने अधिकारों का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा था। शिविर में राजस्व विभाग की टीम और पटवारी ने सभी पक्षों को साथ बैठाकर सहमति बनाई। इसके बाद खाता और खसरा रिकॉर्ड का शुद्धिकरण कर सीमांकन के जरिए भूमि का स्पष्ट विभाजन सुनिश्चित किया गया तथा किसानों को मौके पर ही नई जमाबंदी की प्रतिलिपि सौंप दी गई। बुजुर्ग मांगीलाल की पेंशन कुछ घंटों में स्वीकृत हिण्डोली तहसील की ग्राम पंचायत डाटून्दा में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर में 80 वर्षीय मांगीलाल की नई पेंशन का मामला कुछ ही घंटों में निपटा दिया गया। शिक्षा और राजस्व विभाग के समन्वय से आय प्रमाण-पत्र तैयार कराया गया, जनआधार में आवश्यक अपडेट किए गए और राजएसएसपी एप पर फेस रिकॉग्निशन तकनीक के जरिए मोबाइल से ही पेंशन स्वीकृत कर दी गई। प्रक्रिया पूरी होते ही शिविर स्थल पर ही उन्हें पीपीओ प्रमाण-पत्र भी सौंप दिया गया। मांगीलाल और उनके परिजनों ने कहा कि शिविर नहीं होता तो उन्हें कई दिनों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते। 'आवेदन से समाधान' की अवधारणा हो रही साकार इन तीनों मामलों ने दिखाया कि शहरी और ग्रामीण सेवा शिविरों का उद्देश्य 'आवेदन से समाधान तक' की प्रक्रिया को एक ही स्थान पर पूरा करना है। विभागीय समन्वय, तकनीक के उपयोग और मौके पर निर्णय लेने की व्यवस्था से न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि आमजन का सरकारी व्यवस्था पर भरोसा भी मजबूत हो रहा है।