इंदिरा गांधी नहर की मरम्मत का काम पूरा होने के बाद आखिरकार 45 दिन की नहरबंदी समाप्त हो गई है। मरम्मत के काम में कुछ घंटे ज्यादा लगने के कारण सोमवार को पंजाब से करीब 12 घंटे की देरी से दोपहर 12 बजे 100 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। रात तक पानी की मात्रा बढ़ाकर 500 क्यूसेक कर दी गई। यह पानी करीब 6 दिन का सफर तय करके 17 से 18 मई के बीच बीकानेर पहुंचेगा। इससे पिछले एक महीने से रिजर्व स्टॉक (भंडारित पानी) के भरोसे चल रही शहर और गांवों की पेयजल व्यवस्था को बड़ी राहत मिलेगी। 27 मार्च से नहरबंदी शुरू हुई थी। ये आंशिक नहरबंदी थी और 12 अप्रैल तक 2000 क्यूसेक पानी पीने के लिए मिलता रहा लेकिन 12 अप्रैल से पूर्ण नहरबंदी शुरू हो गई जिसमें पीने का पानी भी बंद हो गया। बीते 30 दिनों से इंदिरा गांधी नहर पर आश्रित शहर और गांव भंडार किए गए पानी से ही प्यास बुझा रहे हैं। बीती रात 12 बजे हरिके से पानी छोड़ा जाना चाहिए था मगर नहर में फिनिशिंग काम अधूरा होने के कारण करीब 12 घंटे बाद सोमवार की दोपहर 12 बजे 100 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। पंजाब से छोड़ा गया पानी करीब 50 से 60 घंटे का सफर तय कर 204 किलोमीटर दूर राजस्थान की सीमा मसीतावाली हेड पहुंचेगा। वहां से बीकानेर जिला सीमा (सतासर) की दूरी करीब 150 से 170 किलोमीटर है। कंवरसेन लिफ्ट नहर के बिरधवाल हेड (आरडी 620) से बीछवाल जलाशय के लिए पानी लिया जाएगा, जिसकी दूरी करीब 160 किलोमीटर है। यह नहर ऊंचाई पर होने के कारण यहां पानी पंप करके आगे बढ़ाया जाता है। नहर में एक महीने से जमा कचरे के कारण पानी पहुंचने में करीब 6 दिन का समय लगेगा। बीछवाल में 7, शोसासर में 9 दिन का पानी बीछवाल जलाशय में सोमवार सुबह तक 310 एमएलडी पानी का स्टॉक था। रोजाना 40 एमएलडी की खपत के हिसाब से यहां सिर्फ 7 दिन का पानी बचा है। यदि 17-18 मई तक पानी नहीं पहुंचता है, तो बीछवाल इलाके में पानी की कटौती बढ़ानी पड़ सकती है। इसके लिए कंवरसेन लिफ्ट के पंपिंग स्टेशनों को दुरुस्त रखना होगा। दूसरी ओर, गजनेर लिफ्ट से जुड़ने वाले शोभासर जलाशय में 370 एमएलडी पानी है, जो 40 एमएलडी की दैनिक खपत के अनुसार 9 दिन तक चलेगा। 3 की जगह 6 साल में हुई मरम्मत, अब 18000 क्यूसेक पानी मिलेगा पंजाब सीमा में 116 किलोमीटर क्षेत्र में नहर की मरम्मत का जो काम 3 साल में पूरा होना था, उसे पूरा होने में 6 साल का वक्त लगा। अब तक पंजाब सरकार नहर को जर्जर बताकर राजस्थान को 11 हजार क्यूसेक से ज्यादा पानी नहीं दे रही थी। मरम्मत पूरी होने के बाद अब अभियंताओं को यह देखना होगा कि क्या राजस्थान को उसके हिस्से का 15 से 18 हजार क्यूसेक पानी मिल पाएगा और नहर में पानी की होने वाली 500 से 1000 क्यूसेक की बर्बादी रुकेगी या नहीं। “यह सही है कि हरिके से पानी रात 12 बजे छोड़ा जाना था, लेकिन अच्छी बात यह है कि सोमवार दोपहर को 100 क्यूसेक पानी छोड़कर नहरबंदी खत्म कर दी गई है। इस पानी को बीकानेर तक पहुंचने में करीब 6 दिन का समय लग सकता है। उम्मीद है कि बीकानेर में पीने के पानी की कोई किल्लत नहीं होगी।”
-विवेक गोयल, चीफ इंजीनियर, आईजीएनपी