भास्कर न्यूज | प्रतापगढ़ प्रतापगढ़ से मंदसौर तक का सफर कभी अत्याधुनिक सीमेंटेड सड़क के कारण सुगम माना जाता था, लेकिन अब यह मार्ग यात्रियों के लिए परेशानी और खतरे का कारण बन गया है। वर्ष 2019 में राजस्थान स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (आरएसआरडीसी) द्वारा करीब 61 करोड़ 81 लाख रुपए की लागत से निर्मित 20 किलोमीटर लंबे इस मार्ग की हालत सात वर्ष के भीतर ही खराब हो गई है। सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे और चौड़ी दरारें दिखाई दे रही हैं। सड़क की बदहाली को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ने के बाद विभाग ने मरम्मत कार्य शुरू किया है। हालांकि सीमेंटेड सड़क की मरम्मत डामर आधारित पैचवर्क से किए जाने पर गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार जहां सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है, वहां फिलिंग कर विशेष तकनीक से मरम्मत की जा रही है। इसमें नीचे 6 एमएम का मटेरियल और ऊपर पॉली सल्फाइड का उपयोग किया जा रहा है। आरएसआरडीसी ने पूरे 20 किलोमीटर मार्ग को दो हिस्सों में बांटकर मरम्मत कार्य शुरू किया है। पहले चरण में प्रतापगढ़ से टोल नाके तक तथा दूसरे चरण में टोल नाके से मंदसौर सीमा तक अलग-अलग टीमों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रतापगढ़. सीमेंटेड रोड पर जगह-जगह किया गया डामर का पेचवर्क। प्रतापगढ़ से मंदसौर की ओर बढ़ते ही सड़क की खराब स्थिति नजर आने लगती है। कई स्थानों पर सड़क के बीच और किनारों पर बड़ी-बड़ी दरारें उभर आई हैं। कुछ जगहों पर दरारों में भरा गया डामर भी उखड़ चुका है। सड़क की सतह असमान होने से वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के मौसम में यह मार्ग और अधिक खतरनाक हो गया है। सड़क पर भरे पानी के कारण गड्ढों और दरारों का अंदाजा नहीं लग पाता। ऐसे में ओवरटेकिंग या तेज गति से वाहन चलाने पर दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण के समय इसे अत्याधुनिक और टिकाऊ बताया गया था, लेकिन कुछ वर्षों में ही इसकी गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए। उनका आरोप है कि अब पैचवर्क के जरिए केवल अस्थायी समाधान किया जा रहा है। आरएसआरडीसी के प्रभारी अधिकारी सुनील मीणा ने बताया कि मार्ग पर भारी वाहनों का दबाव रहता है। कुछ स्थानों पर काली मिट्टी होने और जमीन खिसकने के कारण सड़क में दरारें आई हैं। सड़क को बने 7 से 9 वर्ष हो चुके हैं। जहां भी तकनीकी समस्या सामने आई है, वहां मरम्मत कार्य कराया जा रहा है और सड़क को सुरक्षित बनाने के प्रयास जारी हैं।