किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए चलाए जा रहे ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) टीकाकरण अभियान में राजधानी जयपुर काफी पीछे है। केन्द्र सरकार की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में जयपुर-प्रथम 39वें और जयपुर-द्वितीय 42वें स्थान पर है। सबसे बड़ी बात यह है कि प्रदेश की राजधानी होने और स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय सहित वरिष्ठ अधिकारियों के यहीं बैठने के बावजूद अभियान गति नहीं पकड़ पाया है। रिपोर्ट के अनुसार जयपुर-प्रथम में लक्ष्य के मुकाबले केवल 19.30 प्रतिशत तथा जयपुर-द्वितीय में 13.48 प्रतिशत किशोरियों का ही टीकाकरण हो पाया है। जयपुर-प्रथम को 36,997 और जयपुर-द्वितीय को 28,109 किशोरियों का टीकाकरण करना है, लेकिन अब तक क्रमशः 7,139 और 3,790 किशोरियों को ही एचपीवी का टीका लगाया गया है। इधर, राष्ट्रीय स्तर पर टीकाकरण प्रदर्शन में बिहार पहले, मध्यप्रदेश दूसरे और कर्नाटक तीसरे स्थान पर हैं, जबकि राजस्थान 7वें स्थान पर है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आशा सहयोगिनी, एएनएम और स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार स्कूलों में जाकर संपर्क कर रही हैं तथा अभिभावकों की काउंसलिंग भी की जा रही है। इसके बावजूद स्कूलों में परीक्षाएं, गर्मी की छुट्टियां, टीके को लेकर फैली भ्रांतियां और जागरूकता की कमी के कारण अभियान की रफ्तार धीमी है। विशेषज्ञों का कहना है कि सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाले प्रमुख कैंसरों में शामिल है, जबकि एचपीवी संक्रमण इसकी सबसे बड़ी वजह माना जाता है। समय पर लगाया गया एचपीवी टीका भविष्य में इस कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है। प्रदेश में ये जिले सबसे आगे राजस्थान में एचपीवी टीकाकरण में डीग ने 100.42 प्रतिशत उपलब्धि के साथ पहला स्थान हासिल किया है। सिरोही (80.01%) दूसरे, भीलवाड़ा (67.54%) तीसरे, झालावाड़ (63.21%) चौथे और झुंझुनूं (53.26%) पांचवें स्थान पर हैं। इसके विपरीत जयपुर-प्रथम और जयपुर-द्वितीय निचले पायदानों पर बने हुए हैं।