पंजाब के खडूर साहिब से खालिस्तान समर्थक सांसद अमृतपाल सिंह की रिहाई के लिए समर्थक चंडीगढ़ में प्रदर्शन कर रहे हैं। वह पंजाब के सीएम भगवंत मान के सेक्टर 2 स्थित सरकारी कोठी में घुसने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग कर दी है। चंडीगढ़ के IG और SSP वहां तैनात हैं। सांसद अमृतपाल की पार्टी अकाली दल (वारिस पंजाब दे) की अगुआई में कुछ प्रदर्शनकारी सीएम की कोठी से करीब एक Km दूर तक पहुंच चुके हैं। इसे देखते हुए CM सिक्योरिटी भी हाई अलर्ट मोड पर है। रिजर्व फोर्स मंगवा ली गई है। फिलहाल माहौल पूरी तरह से तनावपूर्ण बना हुआ है। इन प्रदर्शनकारियों ने दोपहर में मोहाली से कूच किया था। जिन्हें रोकने के लिए मोहाली-चंडीगढ़ बॉर्डर पर चंडीगढ़ पुलिस की बैरकेडिंग थी। पुलिस के रोकने पर प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़ दी। पुलिस के बैरिकेड उठाकर दूर फेंक दिए और आगे बढ़ने लगे। यह देखते हुए पुलिस ने वाटर कैनन से प्रदर्शनकारियों पर पानी की बौछारें मार दीं। जिससे कुछ प्रदर्शनकारी भड़क गए और वाटर कैनन पर चढ़ गए। उन्होंने वाटर कैनन का मुंह ही दूसरी तरफ मोड़ दिया। जिसके बाद पैदल व गाड़ियों में प्रदर्शनकारी सीएम कोठी की तरफ लगातार आगे बढ़ते जा रहे हैं। उधर, अमृतपाल के पिता तरसेम सिंह ने कहा कि सरकार हमारे प्रोटेस्ट को गलत दिखाना चाहती है, इसलिए उसने इसमें उपद्रवी घुसा दिए हैं। वही लोग इस तरह की हरकतें कर रहे हैं। प्रदर्शन से जुड़े PHOTOS… सांसद अमृतपाल कौन, अभी उन्हें रिहा करने की मांग क्यों? अमृतपाल सिंह 2024 में पंजाब की खडूर साहिब लोकसभा सीट से निर्दलीय चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। उन्होंने कांग्रेस के कुलबीर सिंह जीरा को करीब 1.97 लाख वोटों से हराया, जो पंजाब की सबसे बड़ी जीतों में शामिल थी। चुनाव के समय वह असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद थे। इससे पहले सितंबर 2022 में उन्होंने एक्टर दीप सिद्धू की मौत के बाद दुबई से आकर 'वारिस पंजाब दे' संगठन की कमान संभाली। 23 अप्रैल 2023 को अमृतपाल को अजनाला थाने पर हमले के आरोप में मोगा से गिरफ्तार किया गया। इसके बाद राष्ट्रीय सुरक्षा एक्ट (NSA) लगाकर असम की डिब्रूगढ़ जेल में भेज दिया गया। पंजाब में 7 महीने बाद चुनाव हैं, ऐसे में उनका संगठन अब राजनीतिक दल अकाली दल (वारिस पंजाब दे) बन चुका है। जिसमें अमृतपाल को सीएम चेहरा घोषित करने के साथ उनके जेल से चुनाव लड़ने का भी ऐलान किया गया है। उनके संगठन का आरोप है कि अमृतपाल पर पंजाब सरकार जानबूझकर NSA की अवधि बढ़ा रही है, जिस वजह से वह खडूर साहिब से लोकसभा प्रतिनिधि होने के बावजूद लोगों के काम नहीं करवा पा रहे हैं। बंदी सिख कौन, उनकी रिहाई की मांग क्यों? सिख संस्थाओं के मुताबिक बंदी सिख उन सिख कैदियों को कहा जाता है, जिन्होंने विभिन्न मामलों में सजा पूरी कर ली है, लेकिन वे कानूनी, प्रशासनिक या अन्य कारणों से अब भी जेल में हैं। प्रदर्शन से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…