आषाढ़ मास की पूर्णिमा पर बुधवार को चित्तौड़गढ़ में गुरु पूर्णिमा का पर्व श्रद्धाभाव के साथ मनाया गया। शहर के मंदिरों और आश्रमों में सुबह से ही भक्तों का आना-जाना शुरू हो गया था। लोगों ने अपने गुरुजनों का पूजन कर उनका आशीर्वाद लिया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। हजारेश्वर महादेव मंदिर में महंत श्री चन्द्रभारती महाराज, विनोद यति महाराज के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। वहीं बूंदी रोड स्थित रामद्वारे में संत दिग्विजय राम महाराज के सान्निध्य में गुरु पूर्णिमा का आयोजन हुआ, जहां देश के अलग-अलग हिस्सों से आए भक्तों ने गुरु वंदन किया। इसी मौके पर रामद्वारा में चातुर्मास सत्संग की भी शुरुआत हुई। हजारेश्वर महादेव मंदिर और रामद्वारे में दिनभर रही रौनक गुरु पूर्णिमा के मौके पर हजारेश्वर महादेव मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। महंत श्री चन्द्रभारती महाराज, विनोद यति महाराज के दर्शन कर लोगों ने उनका आशीर्वाद लिया। कई परिवार बच्चों के साथ पहुंचे और गुरु परंपरा के महत्व के बारे में जाना। दूसरी ओर बूंदी रोड स्थित रामद्वारे में भी संत दिग्विजय राम महाराज के सान्निध्य में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। यहां गुरु पूर्णिमा के साथ चातुर्मास सत्संग का शुभारंभ किया गया। संतों ने कहा कि चातुर्मास आत्मचिंतन, सत्संग और आध्यात्मिक साधना का समय है। विधायक ने लिया आशीर्वाद, मुख्यमंत्री ने भेजा संदेश चित्तौड़गढ़ विधायक चंद्रभान सिंह आक्या ने गुरु पूर्णिमा पर हजारेश्वर महादेव मंदिर पहुंचकर महंत श्री चन्द्रभारती महाराज, विनोद यति महाराज और दिग्विजय राम महाराज का आशीर्वाद लिया। विधायक ने कहा कि गुरु ही जीवन में सही रास्ता दिखाते हैं और उनके आशीर्वाद से ही आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। इस मौके पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने महंत श्री चन्द्रभारती जी महाराज को पत्र भेजकर गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अपने संदेश में लिखा कि गुरु ज्ञान, संस्कार और जीवन मूल्यों के सबसे बड़े मार्गदर्शक होते हैं और भारतीय संस्कृति में उनका स्थान सर्वोच्च माना गया है। मुख्यमंत्री ने महंत के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और समाज के लिए उनके निरंतर मार्गदर्शन की कामना भी की। गुरु जीवन को सही दिशा देने का माध्यम हजारेश्वर महादेव मंदिर के पंडित श्रवण कुमार ने बताया कि सनातन परंपरा में गुरु का स्थान भगवान से भी ऊंचा माना गया है। गुरु सिर्फ शिक्षा नहीं देते, बल्कि जीवन की कठिन परिस्थितियों में सही रास्ता भी दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु का आशीर्वाद लेना शुभ माना जाता है। यही वजह रही कि सुबह से शाम तक मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही रही। लोगों ने पूजा-अर्चना कर अपने गुरु के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की। वेद व्यास की स्मृति में मनाया जाता है यह पर्व धार्मिक मान्यता के अनुसार गुरु पूर्णिमा महर्षि वेद व्यास की जयंती के रूप में मनाई जाती है। उन्होंने महाभारत की रचना की और वेदों को व्यवस्थित रूप दिया, इसलिए उन्हें आदिगुरु कहा जाता है। गुरु पूर्णिमा का पर्व गुरु के प्रति सम्मान, विश्वास और आभार व्यक्त करने का अवसर माना जाता है। इस बार भी चित्तौड़गढ़ में मंदिरों और आश्रमों में पूरे दिन श्रद्धा का माहौल रहा। लोगों ने अपने गुरुजनों का आशीर्वाद लेकर जीवन में अच्छे संस्कार और सही मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।