परिवार ने जिसे मृत समझकर पिंडदान कर दिया। पत्नी विधवा बनकर रह रही थी। वह व्यक्ति 12 साल बाद भरतपुर के अपना आश्रम में मिला। जब बेटे, भाई और पत्नी ने उसे देखा तो उनके आंखों से आंसू छलक उठे। एक दूसरे के गले लगकर रोने लगे। पत्नी समेत सभी ने उसके पैर छूकर आशीर्वाद लिए। दरअसल झारखंड ​के गढ़वा निवासी सुनील (55) 2014 में अपनी बहन से मिलने छपरा गए थे। वह बहन के घर नहीं पहुंचे और न ही वापस अपने घर आए। परिवार के लोगों ने उनको बहुत ढूंढा, लेकिन वह नहीं मिले। उस समय झारखंड में बाढ़ आई थी। परिजनों ने सोचा कि वह बाढ़ में बह गए होंगे। मंगलवार को का भाई मनोज, बेटा नरेश और पत्नी अमरावती उन्हें लेने के लिए अपना घर आश्रम पहुंची। तो, सभी लोग कुछ देर तक सुनील को निहारते रहे। मनोज, नरेश और अमरावती ने सुनील का पैर छुए। इस सीन को देख हर कोई भावुक हो गया। सुनील को 5 महीने पहले किया था रेस्क्यू अपना घर आश्रम के नरेंद्र तिवारी ने बताया- करीब 5 महीने पहले अपना घर आश्रम की टीम ने अंबाला रेलवे स्टेशन से एक बीमार, कुपोषित और असहाय व्यक्ति को रेस्क्यू किया था। व्यक्ति चल भी नहीं पा रहा था और, टीवी के रोग से ग्रसित था। प्राथमिक उपचार के बाद व्यक्ति को भरतपुर के अपना घर आश्रम में भेजा गया। अपना घर आश्रम में उसका उपचार हुआ और धीरे-धीरे व्यक्ति की हालत में सुधार होने लगा। तब व्यक्ति ने अपना नाम सुनील बताया। सुनील का उपचार जारी रहा। धीरे-धीरे वह स्वस्थ होने लगा। उसने 7 दिन पहले अपने घर का पता बताया। आश्रम के लोगों ने झारखंड में स्थानीय पुलिस से संपर्क किया। बहन से मिलने गए फिर कभी नहीं लौटे झारखंड ​के गढ़वा निवासी मनोज ने बताया- 12 साल पहले की बात है मेरा बड़े भाई सुनील (55) बहन से मिलने छपरा गए थे। वह बहन के घर नहीं पहुंचे और न ही अपने घर लौटे। सुनील के लापता होने के कुछ दिनों बाद झारखंड में बाढ़ आई थी। उस समय उनका बेटा नरेश 8 साल का था। परिवार के लोगों ने सुनील को रिश्तेदारी सहित कई जगह ढूंढा लेकिन, उनका कुछ पता नहीं लगा। सुनील के गुमशुदगी दर्ज करवाई गई। जब वह नहीं मिले तो, परिवार के लोगों को आशंका हुई कि वह बाढ़ में बह गए होंगे। जिसके बाद परिजनों ने उन्हें मृत मान लिया। पत्नी विधवा बन कर जी रही थी सुनील के नहीं मिलने पर परिजनों ने उनका पिंडदान तक कर दिया। इसके बाद उनकी पत्नी अमरावती विधवा का जीवन बिताने लगी। परिवार में शादी हुई तो, उसमें भी सुनील के नाम के आगे स्वर्गीय लिखा गया था।