एसएमएस अस्पताल में मुख्यमंत्री निशुल्क निरोगी राजस्थान योजना मरीजों का दर्द कम करने की बजाय बढ़ा रही है। अभी 20 तरह की सामान्य दवाएं नहीं मिल रही हैं। इनमें खून पतला करने वाली एस्प्रिन, निफेडिपिन, जोड़ों के दर्द में कैल्शियम एवं विटामिन डी-3 टैबलेट, खांसी का कफ सिरप, स्किन एलर्जी की ग्लिसरीन एवं बिलास्टीन 20 एमजी, आंखों की एट्रोपीन सल्फेट ऑफ्थेल्मिक सॉल्यूशन, दांतों की डेंटल जेल, दर्द की एसीक्लोफेनाक और एंटीबायोटिक शामिल हैं। इसका प्रमुख कारण राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आरएमएससीएल) से समय पर आपूर्ति नहीं होना है। इन दो केसों से समझिए वास्तविक स्थिति केस-1; दिल की गंभीर बीमारी का इलाज करा रहे 69 वर्षीय गोविन्द सिंह सोमवार को कार्डियोवैस्कुलर साइंसेज संस्थान में डॉक्टर को दिखाने पहुंचे। 3 रुपए की एस्प्रिन जैसी सामान्य दवा भी नहीं मिली। उन्हें धन्वन्तरि भवन के पास अनुपलब्ध दवा वितरण केंद्र के काउंटर-10 और 11 पर जाना पड़ा। इसमें करीब 35 मिनट लग गए। केस-2; जोबनेर निवासी 70 वर्षीय ओम कंवर जोड़ों के दर्द और हड्डियों में कैल्शियम की कमी से परेशान हैं। डॉक्टर ने कैल्शियम कार्बोनेट एवं विटामिन डी-3 टैबलेट लिखी थी। तकलीफ बढ़ने पर सोमवार को दोबारा दिखाया तो वही दवा लिखी गई। मरीज ने बताया कि एक माह पहले भी आए थे, तब दवा नहीं मिली थी। आज भी नहीं मिली। ऐसे में चक्कर लगाना मजबूरी है। आरएमएससीएल से दवाओं की आपूर्ति नहीं हो रही है आरएमएससीएल से दवाओं की आपूर्ति नहीं होने के कारण मरीजों की परेशानियों को देखते हुए लोकल पर्चेज करनी पड़ रही है। कौन-कौनसी दवा की आपूर्ति नहीं हो रही है, यह पता करके पूर्ति करवाएंगे। -डॉ. दीपक माहेश्वरी, प्राचार्य, एसएमएस मेडिकल कॉलेज, जयपुर फोटोकॉपी और दोबारा लाइन में लगने की मजबूरी एसएमएस के कार्डियोवैस्कुलर साइंसेज संस्थान में डॉक्टर को दिखाने के बाद मरीज दवा काउंटर पहुंचते हैं तो अनुपलब्ध दवाओं के लिए काउंटर नंबर 10 और 11 पर भेज दिया जाता है। यहां लंबी कतार में लगने के बाद पर्ची की दो फोटोकॉपी मांगी जाती हैं। फोटोकॉपी लाने पर दोबारा कतार में लगना पड़ता है। इसमें आधा घंटा लग जाता है। बाइक या कार से आने वाले मरीजों को रजिस्ट्रेशन काउंटर के वेटिंग एरिया में बने दवा वितरण केंद्र तक पहंुचने में करीब दो किमी का चक्कर लगाना पड़ता है।