बाल विवाह के दुष्परिणामों के मामले में एक शोध में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। बाल विवाह पीड़ित बालिकाओं के मुकाबले बालकों की शारीरिक-मानसिक स्थिति अधिक गड़बड़ा जाती है। ऐसा कच्ची उम्र में बड़ी जिम्मेदारियों का बोझ कंधों पर आ जाने के कारण होता है। शोध में सामने आया कि जो बालक-बालिकाएं अपने विवाह को कानूनन शून्य (निरस्त) करवा पाते हैं वे एंजाइटी, असुरक्षा की भावना और डिप्रेशन जैसी समस्याओं से उबर पाते हैं। जो बच्चे परिवार-समाज के द​बाव में अपने ही विवाह का विरोध नहीं कर पाते, इन समस्याओं के चलते कई बार उनका मानसिक स्तर ही बुरी तरह गड़बड़ा जाता है। पुनर्वास मनोवैज्ञानिक एवं सारथी ट्रस्ट जोधपुर की मैनेजिंग ट्रस्टी डॉ. कृति भारती ने बाल विवाह के बंधन में जकड़े और विवाह शून्य करवाने वाले, दोनों ही तरह के बालक-बालिकाओं को विभिन्न श्रेणियों में बांटते हुए यह मनोवैज्ञानिक एवं तुलनात्मक शोध किया है। इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च (आईसीएसएसआर) ने इस पोस्ट डॉक्टोरल शोध को अप्रूव किया है। बता दें कि डॉ. कृति अब तक 54 बाल विवाहों को कानूनन निरस्त करवा चुकी हैं। किरण व सुरेश बोले- मन करता था, घर छोड़कर भाग जाएं केस-01 - जोधपुर जिले के एक गांव की किरण (19) ने बताया, मैं 15 साल की थी तब परिवार के अन्य बच्चों के साथ मेरा भी विवाह करा दिया गया। विरोध किया लेकिन किसी ने एक नहीं सुनी। मुझे कहा गया कि पढ़ाई नहीं छुड़वाएंगे, गौना 5 साल बाद करेंगे। लेकिन 3 महीने बाद ही गौना कर ससुराल भेज दिया गया। पढ़ाई भी बंद करवा दी गई। ससुराल वाले प्रताड़ित भी करने लगे। पीहर लौटना चाहा तो मां ने परिवार की इज्जत की दुहाई दे दी। अवसाद में आकर आत्महत्या का प्रयास किया, घर से भागने की कोशिश की। इस बीच गर्भवती हुई और बाद में बच्चे को जन्म दिया तो विक्षिप्त सी हो गई। केस-02 - बाड़मेर जिले के सुरेश (18) ने बताया, मैं 11 साल का था, पांचवीं में पढ़ रहा था तब ब्याह हो गया। लड़की मेरे ही स्कूल में तीसरी कक्षा में थी। सहपाठी मुझे चिढ़ाते, मैं खीझ जाता था। पढ़ाई से मन उचटने लगा। घर से निकलता लेकिन स्कूल नहीं जाता। आखिर 14 साल की उम्र में स्कूल छुड़वाकर मुझे काम में लगा दिया गया। घर से भागा तो पुलिस वापस पकड़ लाई। 17 साल का हुआ तो गौना करा दिया। अचानक इतनी जिम्मेदारी आ पड़ी। मैं खर्च नहीं उठा पाया तो झगड़े होने लगे। परेशान होकर मैं नशा करने लगा। सिर पर कर्ज बढ़ गया। लोग मुझे पागल कहने लगे हैं। (सभी के नाम परिवर्तित हैं)