नई अफीम नीति 2026-27 में मॉर्फीन की पात्रता सीमा 4.2 से बढ़ाकर 4.4 करने और अन्य प्रावधानों के विरोध में भारतीय किसान संघ ने आंदोलन की चेतावनी दी है। संघ का कहना है कि नई नीति से हजारों किसान अफीम की खेती से बाहर हो सकते हैं। किसान संघ ने मॉर्फीन की सीमा घटाकर 4.0 करने, पुराने पट्टे बहाल करने और 2 लाख नए पट्टे जारी करने समेत कई मांगें उठाई हैं। संघ ने चेताया कि सरकार ने जल्द बदलाव नहीं किया तो चित्तौड़ प्रांत सहित सभी अफीम उत्पादक क्षेत्रों में किसान सड़कों पर उतरेंगे। दिल्ली में वित्त मंत्री से हुई थी बैठक, लेकिन मांगें नीति में शामिल नहीं भारतीय किसान संघ के प्रांतीय पदाधिकारी सोहन अंजना ने बताया - किसान संघ लंबे समय से किसानों की मांगों को लेकर सरकार के सामने आवाज उठा रहा है। इसी सिलसिले में सितंबर महीने में नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ किसान प्रतिनिधियों की लंबी बैठक हुई थी। उस दौरान किसानों को उम्मीद थी कि उनकी मांगों को नई नीति में शामिल किया जाएगा। लेकिन नई अफीम नीति जारी होने के बाद पता चला कि किसानों की प्रमुख मांगों को इसमें जगह नहीं मिली। इससे किसानों में निराशा बढ़ गई है। अब संघ नीति में बदलाव की मांग कर रहा है। मॉर्फीन की सीमा 4.4 करने पर सबसे ज्यादा विरोध सोहन अंजना के अनुसार, नई नीति में सबसे बड़ा बदलाव मॉर्फीन की पात्रता को लेकर किया गया है। पहले जिन किसानों की अफीम में मॉर्फीन का औसत 4.2 होता था, उन्हें लुवाई-चिराई के लिए 10 आरी का पट्टा मिल जाता था। अब यह सीमा बढ़ाकर 4.4 कर दी गई है। संघ का कहना है कि इससे बड़ी संख्या में किसान पात्रता से बाहर हो जाएंगे। इसके साथ ही सीपीएस व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं। संघ के मुताबिक, सरकार 10 आरी पर 90 किलो सीपीएस डोडे देने की व्यवस्था कर रही है, जबकि किसान पारंपरिक तरीके से अफीम का गोंद निकालने का अधिकार चाहते हैं। किसान संघ ने मांग की है कि मॉर्फीन की सीमा 4.4 से घटाकर 4.0 की जाए और पात्र किसानों को पहले की तरह लुवाई-चिराई के पट्टे दिए जाएं। पुराने पट्टे बहाल करने और 2 लाख नए पट्टे देने की मांग भारतीय किसान संघ ने सरकार के सामने कई अन्य मांगें भी रखी हैं। संघ की मांग है कि वर्ष 1990 से अब तक अलग-अलग कारणों से निरस्त या बंद किए गए सभी अफीम पट्टे फिर से शुरू किए जाएं। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने के लिए कम से कम 2 लाख नए अफीम पट्टे जारी किए जाएं। इसके अलावा किसानों को अफीम का न्यूनतम समर्थन मूल्य 10 हजार रुपए प्रति किलो देने की मांग की गई है। संघ चाहता है कि अफीम का गोंद निकालने के बाद बचने वाले डोडे को एनडीपीएस एक्ट के दायरे से बाहर किया जाए। किसान संघ ने हर साल नई नीति जारी करने की व्यवस्था खत्म कर स्थायी और पारदर्शी अफीम नीति लागू करने की मांग भी की है। इसके साथ ही परिवार में जीवित नामांतरण की व्यवस्था फिर से शुरू करने की मांग उठाई गई है। सांसदों से केंद्र सरकार के सामने मुद्दा उठाने की अपील किसान संघ ने अफीम उत्पादक क्षेत्रों के सभी सांसदों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर किसानों के हित में केंद्र सरकार और वित्त मंत्रालय से बात करने की अपील की है। संघ का कहना है कि अगर जल्द ही नीति में संशोधन नहीं किया गया तो किसान बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे। संघ ने कहा कि ऐसी स्थिति में इसकी पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार और प्रशासन की होगी। किसान संघ के मुताबिक, अफीम उत्पादक किसान लंबे समय से अपनी मांगें शांतिपूर्ण तरीके से उठाते रहे हैं, लेकिन अब भी उनकी अनदेखी हुई तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।