यूनेस्को विश्व धरोहर चित्तौड़गढ़ दुर्ग अब बड़े बदलाव के दौर से गुजरने वाला है। केंद्र सरकार ने इसे DESH योजना में शामिल किया है, जिसके तहत करीब 108 करोड़ रुपए की लागत से पहले विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जाएगी और फिर चरणबद्ध तरीके से संरक्षण व विकास कार्य शुरू होंगे। योजना के तहत ऐतिहासिक इमारतों का संरक्षण किया जाएगा, पद्मिनी महल में नई हिस्ट्री गैलरी बनेगी, आधुनिक साइट म्यूजियम, वॉकवे, व्यूइंग डेक, इंटरप्रिटेशन सेंटर और पर्यटकों के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। डिजिटल तकनीक और ऑडियो-विजुअल माध्यमों से मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास को नए अंदाज में प्रस्तुत किया जाएगा। सभी काम यूनेस्को के नियमों के तहत किए जाएंगे, ताकि दुर्ग का मूल स्वरूप सुरक्षित रहे। इससे पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिलेगा, चित्तौड़गढ़ की ऐतिहासिक विरासत को नई पहचान मिलेगी और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। DESH योजना में शामिल हुआ चित्तौड़गढ़ दुर्ग यूनेस्को विश्व धरोहर चित्तौड़गढ़ दुर्ग को केंद्र सरकार ने बजट 2026-27 में घोषित DESH (डेवलपमेंट ऑफ एक्सवेटेड साइट्स एंड हेरिटेज कॉम्प्लेक्स) योजना के तहत देश के 15 प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों में शामिल किया है। करीब 108 करोड़ रुपए की इस परियोजना से दुर्ग के संरक्षण और पर्यटन सुविधाओं के विकास का नया चरण शुरू होगा। डीपीआर के बाद शुरू होंगे काम योजना के तहत सबसे पहले विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से काम शुरू होगा। पद्मिनी महल में भी 30 से 40 लाख की लागत से आधुनिक तकनीक से सुसज्जित नई हिस्ट्री गैलरी बनाने का भी प्रस्ताव है। पिछले 12 वर्षों में हुए कई विकास कार्य सांसद सीपी जोशी ने बताया कि बीते करीब 12 सालों में रिंग रोड, सूरजपोल मार्ग, रतन सिंह महल और फतेह प्रकाश महल के संरक्षण, घी बावड़ी व तेल बावड़ी के जीर्णोद्धार, नगीना बाजार के विकास, सुरक्षा रेलिंग और लाइट एंड साउंड शो जैसे कई काम पूरे किए गए हैं। अधूरी सुविधाओं को किया जाएगा पूरा पर्यटकों के लिए शौचालय, शेड, टिकट काउंटर, क्लॉक रूम और वेटिंग एरिया का काम बीच में रुक गया था। अब इन परियोजनाओं को दोबारा शुरू कर जल्द पूरा किया जाएगा, ताकि पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। विरासत संरक्षण के साथ बढ़ेगा रोजगार सांसद ने कहा कि यह योजना सिर्फ निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि चित्तौड़गढ़ की ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए उसे देश-दुनिया के सामने बेहतर ढंग से प्रस्तुत करने की पहल है। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। यूनेस्को के नियमों के अनुसार होंगे सभी कार्य दुर्ग विश्व धरोहर सूची में शामिल है, इसलिए सभी निर्माण और विकास कार्य संबंधित संस्थाओं की अनुमति और तय नियमों के तहत ही किए जाएंगे। उद्देश्य ऐतिहासिक स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए सुविधाओं का विस्तार करना है। आधुनिक तकनीक से जीवंत होगा इतिहास एएसआई के अनुसार, सुरक्षित वॉकवे, व्यूइंग डेक, आधुनिक इंटरप्रिटेशन सेंटर और साइट म्यूजियम बनाए जाएंगे। डिजिटल तकनीक, इमर्सिव स्टोरीटेलिंग और ऑडियो-विजुअल माध्यमों से चित्तौड़गढ़ के इतिहास को जीवंत रूप में दिखाया जाएगा। पर्यटकों को कई भाषाओं में जानकारी और बेहतर गाइड सेवाएं भी मिलेंगी। नई गैलरी और अन्य परियोजनाओं से बदलेगा अनुभव पद्मिनी महल में 30 से 40 लाख रुपए की लागत से नई हिस्ट्री गैलरी बनाई जाएगी। इसके अलावा बायोलॉजिकल पार्क, रोपवे और भविष्य में आधुनिक तकनीक आधारित प्रस्तुतियों की भी तैयारी है। सांसद ने कहा कि इन सभी योजनाओं के पूरा होने से चित्तौड़गढ़ दुर्ग का पर्यटन अनुभव पूरी तरह बदल जाएगा और इसकी विरासत को नई पहचान मिलेगी।