चित्तौड़गढ़ दुर्ग के बाहर और एंट्री मार्गों पर एक्टिव 'लपकों' की वजह से अब पर्यटन व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। इसी मुद्दे को लेकर अधिकृत गाइडों ने विरोध प्रदर्शन किया और मानव श्रृंखला बनाकर प्रशासन से कार्रवाई की मांग की। गाइड संजीव शर्मा ने कहा कि यह सिर्फ गाइड के रोजगार का मामला नहीं है, बल्कि चित्तौड़गढ़ दुर्ग की साख, सही इतिहास और पर्यटकों के भरोसे से जुड़ा बड़ा मुद्दा है। उनका कहना है कि अगर समय रहते इस पर रोक नहीं लगी तो विश्व धरोहर की छवि लगातार प्रभावित होती रहेगी। रास्ते में ही रोक लेते हैं पर्यटकों की गाड़ियां संजीव शर्मा ने बताया कि पिछले कई सालों से कलेक्ट्रेट सर्किल, कपासन चौराहा, पाडनपोल, रामपोल और टिकट विंडो तक कई अनाधिकृत लोग एक्टिव हैं। आरोप है कि ये लोग रास्ते में ही पर्यटकों की गाड़ियां रोक लेते हैं और खुद को अधिकृत गाइड बताकर उनके साथ किले में एंट्री कर जाते हैं। कई बार अलग-अलग नाम बताकर पर्यटकों का विश्वास भी जीत लेते हैं। उनका कहना है कि इससे पर्यटक असली और अधिकृत गाइड तक पहुंच ही नहीं पाते। सबसे बड़ी चिंता यह है कि ऐसे लोग इतिहास की अधूरी या गलत जानकारी देकर पर्यटकों को गुमराह करते हैं, जिससे चित्तौड़गढ़ के गौरवशाली इतिहास की गलत तस्वीर लोगों के सामने पहुंच रही है। रोजगार के साथ पर्यटन व्यवस्था भी हो रही प्रभावित संजीव शर्मा का कहना है कि सरकार ने किले, महलों और संग्रहालयों में गाइडिंग के लिए अधिकृत गाइडों की व्यवस्था बनाई है, लेकिन जमीन पर उसका पालन ठीक से नहीं हो रहा। अधिकृत गाइड तय स्थान पर पर्यटकों का इंतजार करते रहते हैं, जबकि अनाधिकृत लोग नीचे से ही पर्यटकों को अपने साथ ले जाते हैं। इसका सीधा असर अधिकृत गाइडों की आजीविका पर पड़ रहा है। उनका कहना है कि यह सिर्फ रोजगार का नुकसान नहीं है, बल्कि इससे पूरे पर्यटन तंत्र की विश्वसनीयता भी प्रभावित हो रही है। अगर पर्यटकों को सही जानकारी नहीं मिलेगी तो चित्तौड़गढ़ की ऐतिहासिक पहचान पर भी सवाल खड़े होंगे। गाइड बोले- कार्रवाई होगी तो व्यवस्था सुधरेगी प्रदर्शन के दौरान गाइडों ने प्रशासन और पुलिस से मांग की कि किले के आसपास सक्रिय अनाधिकृत गाइडों और लपकों के खिलाफ नियमित अभियान चलाया जाए। संजीव शर्मा ने कहा कि गाइड एसोसिएशन ऐसे लोगों की पहचान कराने और प्रशासन का सहयोग करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उनका कहना है कि उद्देश्य किसी का रोजगार छीनना नहीं, बल्कि विश्व धरोहर स्थल पर व्यवस्था बनाए रखना, पर्यटकों को सही जानकारी दिलाना और उन्हें गुमराह होने से बचाना है। गाइडों का मानना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई की गई तो पर्यटकों का अनुभव बेहतर होगा, अधिकृत गाइडों को भी उनका हक मिलेगा और चित्तौड़गढ़ दुर्ग की ऐतिहासिक गरिमा भी सुरक्षित रहेगी।