खींवसर क्षेत्र में सीमेंट कंपनी के लिए आवंटित करीब 700 बीघा जमीन के सौदों को लालावास निवासी प्रेमाराम जाट ने कुछ लोगों पर मिलीभगत और फर्जी दस्तावेज आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि उनके फर्जी हस्ताक्षर से राजस्थान हाईकोर्ट में राजीनामा पेश किया है। दरअसल, यह मामला तब शुरू हुआ जब किसानों ने आरोप लगाया कि कुछ बिचौलियों ने उनसे कम कीमत पर जमीन खरीदी और बाद में कंपनी को ज्यादा कीमत पर बेचकर करोड़ों रुपए का कथित कमीशन कमाया। प्रेमाराम ने खींवसर उपखंड अधिकारी को शिकायत देकर मामले की निष्पक्ष और बड़े स्तर पर जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कथित फर्जी हस्ताक्षरों की FSL या हस्तलेख विशेषज्ञ से जांच कराने की भी मांग की है। इस मामले में खींवसर थाने में भी मामला दर्ज करवाया गया है। इन लोगों पर मिलीभगत का आरोप प्रेमाराम ने अपनी शिकायत में आत्माराम पुत्र बलदेव राम निवासी ताड़ावास, महेंद्र पुत्र रामदेव निवासी लालावास, महेंद्र पुत्र भोलाराम निवासी लालावास, स्वरूप पुत्र नेनाराम, राकेश मेघवाल और पीयूष पुत्र मांछाराम सहित अन्य लोगों पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। कंपनी से रकम लेकर फर्जीवाड़े का आरोप प्रेमाराम ने आरोप लगाया कि संबंधित कंपनी से बड़ी रकम का लेन-देन कर उनके नाम से फर्जी हस्ताक्षर किए गए और राजीनामा तैयार किया गया। उन्होंने जांच के जरिए यह पता लगाने की मांग की है कि कथित राजीनामा किसने तैयार किया, दस्तावेज पर हस्ताक्षर किसने किए और इसे हाईकोर्ट में किसके जरिए पेश किया गया। उन्होंने पूरे मामले में कथित आर्थिक लेन-देन और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की भी जांच करने की मांग की है। फर्जी हस्ताक्षरों की FSL जांच की मांग प्रेमाराम का कहना है कि उनके फर्जी हस्ताक्षर किए जाने से उन्हें मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कथित राजीनामे को FSL या हस्तलेख विशेषज्ञ के पास भेजने की मांग की है। उन्होंने कहा कि दस्तावेज पर किए गए हस्ताक्षरों को उनके असली हस्ताक्षरों से मिलाया जाए, ताकि वैज्ञानिक जांच के जरिए यह साफ हो सके कि दस्तावेज पर किए गए हस्ताक्षर असली हैं या फर्जी। 700 बीघा जमीन के सौदे में कमीशन लेने के आरोप यह पूरा विवाद खींवसर क्षेत्र में सीमेंट कंपनी के लिए आवंटित करीब 700 बीघा जमीन के सौदों से जुड़ा बताया जा रहा है। किसानों का आरोप है कि कुछ युवकों ने किसानों और कंपनी के बीच बिचौलिए की भूमिका निभाई। आरोप है कि इन लोगों ने किसानों से कम कीमत पर जमीन खरीदी और बाद में उसी जमीन को कंपनी को ज्यादा कीमत पर बेच दिया। किसानों का आरोप है कि इस तरह इन लोगों ने करोड़ों रुपए का कथित कमीशन कमाया। किसानों को जब कथित कमीशनखोरी के इस पूरे खेल की जानकारी मिली तो उन्होंने खींवसर उपखंड अधिकारी को ज्ञापन दिया था। किसानों ने मामले की जांच कराने की मांग की थी। अब सतर्कता समिति में रखा जाएगा मामला खींवसर उपखंड अधिकारी सुनील कुमार ने बताया कि ग्रामीणों ने पहले भी शिकायत दी थी। ग्रामीणों का कहना था कि किसानों को उनकी जमीन की पूरी कीमत नहीं मिली। आरोप था कि कुछ लोगों ने किसानों को पूरी बात बताए बिना कमीशन के नाम पर बड़ी रकम हड़प ली। उपखंड अधिकारी ने बताया कि इस मामले की जांच चल रही है। किसानों से इससे जुड़े कागज मांगे गए हैं, लेकिन उन्होंने अभी तक सभी कागज उपलब्ध नहीं करवाए हैं। सुनील कुमार ने बताया कि अब एक किसान ने बिचौलियों पर आरोप लगाया है कि उसकी जानकारी के बिना उसके नाम से फर्जी स्टांप खरीदा गया और उसके नाम से कोर्ट में राजीनामा पेश किया गया। उन्होंने कहा कि इस मामले को अब सतर्कता समिति में रखकर निस्तारण किया जाएगा। इसके लिए कोर्ट से दस्तावेज मंगवाए जाएंगे और उनकी FSL जांच करवाई जाएगी।